दे गया इश्क में मात वो
( De gaya ishq mein maat wo )
दे गया इश्क में मात वो!
कह गयी कुछ ऐसी बात वो
मुस्कुराता वो मेरे ऊपर
छेड़कर दिल के नग़्मात वो
तोड़कर दिल मुहब्बत भरा
कर गया ग़म की बरसात वो
दूर है जो मिला दें उससे
कर दें ए रब करामात वो
मेरे घर क्यों वो आता नहीं
ठहरे है और कहीं रात वो
नफ़रतों से झोली भर गया
प्यार की क्या दें सौग़ात वो
बेअदबी से आया पेश कल
की भुला अपनी औक़ात वो
भूल जा बेवफ़ा को “आज़म”
प्यार में क्या देगा साथ वो!
शायर: आज़म नैय्यर
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