Category: भोजपुरी कविता

  • हमरा आँखी में लोर के जहान बाटे | Bhojpuri Kavita Hamra Aankhi me

    हमरा आँखी में लोर के जहान बाटे   जेकरा बाटे खाके पी के उतान बाटे आ हमरा घर में नून ना पिसान बाटे। केहू बाकि अंगूरी से चान देखावता हमरा आँखी में लोर के जहान बाटे। बड़ी मोसकिल से गंजी किना जाला उनुका एह पीर के का अनुमान बाटे। लाद के बात त लादे में…

  • जौनपुर घुमाय द्या | Bhojpuri Kavita Jaunpur

    जौनपुर घुमाय द्या किलवा तू जौनपुर कै हमके देखाय द्या, हे! राजा, शाहीपुल चलिके घुमाय द्या। शीतला-चौकिया कै दर्शन उहाँ होई, कब तक राजा ई मनौतिया के ढोईं। शिव और शक्ति कै पुजवा करा द्या, हे! राजा, शाहीपुल चलिके घुमाय द्या। किलवा तू जौनपुर कै हमके देखाय द्या, हे! राजा, शाहीपुल चलिके घुमाय द्या। शिक्षा…

  • कसाई हाथ बछिया

    कसाई हाथ बछिया   कउने संग पगहा धरउला ये बाबूजी, कइसन हम्में दुलहा खरीदला ये बाबूजी। धन कै बड़ा लोभी बाटें हमरो ससुरवा, सासु औ ननद रोज खानी मोर करेजवा। कउने खोंतनवाँ बसउला ये बाबूजी, कइसन हम्में दुलहा खरीदला ये बाबूजी। कउने संग पगहा धरउला ये बाबूजी, कइसन हम्में दुल्हा खरीदला ये बाबूजी। माँगनै दहेज…

  • पुरुआ में सिहरे बदनियाँ

    पुरुआ में सिहरे बदनियाँ   पुरुआ में सिहरे बदनियाँ, कुलेल करे देखा चँदनियाँ। (2) झुरुर- झुरूर बहे पवन पुरवाई, होतैं जो सइयाँ ओढ़उतैं रजाई। काबू में नाहीं जवनियाँ, कुलेल करे देखा चँदनियाँ। पुरुआ में सिहरे बदनियाँ, कुलेल करे देखा चँदनियाँ। उड़ि -उड़ि अँचरा बुलावे सजनवाँ, होई कब उनसे मधुर ऊ मिलनवाँ। रोज-रोज लड़े लै नथुनियाँ,…

  • राम जी कै भइनै जनमवाँ

    राम जी कै भइनै जनमवाँ राम जी कै भइलै जनमवाँ, कि चैत महिनवाँ न हो। ललना लाल भइनै दशरथ भवनवाँ, कि गमके अंगनवाँ न हो। अंगना बाजत बधाइया कि खुश सब मइया न हो। राजा दशरथ लुटावें खजनवाँ कि, लूटेला जहानवाँ न हो। राम जी कै भइलै जनमवाँ, कि चैत महिनवाँ न हो। ललना लाल…

  • करै चला कटनी | Katni par Kavita

    करै चला कटनी   ले ला रोटी-चटनी, करै तू चला कटनी, कि मोर धनिया! फिर से लूटिहा लहरवा कि मोर धनिया। ताजी- ताजी अइली हम अबहिन गवनवाँ, छूटल नाहीं हथवा से मेंहदी सजनवाँ। अउतै करावा मत अइसन खटनी, रजऊ समझा न हमके तू कव्वा-हकनी। ले ला रोटी-चटनी, करै तू चला कटनी, कि मोर धनिया! फिर…

  • वोटवा तव हर केहू चाहे | Vote Par Bhojpuri Kavita

    वोटवा तव हर केहू चाहे   वोटवा तव हर केहू चाहे, आपन कहावेवाला के बा। जीतले पे उड़ि ऊ सुगनवाँ हो, चेहरा दिखावेवाला के बा। पांच साल मुड़ि-मुड़ि रहिया निहरली, परछाईं नेताजी कै नाहीं देख पउली। फिर से दिखाइहैं ऊ अंजोरिया हो, चँदनिया बिछावेवाला के बा। जीतले पे उड़ि ऊ सुगनवाँ हो, चेहरा दिखावेवाला के…

  • सियरा के देहिंया पर बघवा कै खाल बाय

    सियरा के देहिंया पर बघवा कै खाल बाय   सियरा के देहिंया पर बघवा कै खाल बाय कहां गइल सब नाता रिस्ता ,भइल बहुरंगी चाल बाय घूम रहे हैं दुष्ट भेड़िया,नोचत कचोटत खाल बाय युग समाज सब भइल बा अंधा,अंधा इ सरकार बाय गांव गांव घर घर में मचल बा ,धंधा कै बाजार बाय मांग…

  • भिखमंगा | Bhikhmanga

    भिखमंगा  ( Bhikhmanga )    भुख से टुटल बा, पेट ओके रुठल बा दु दाना के आश बा, ओके इहे पियास बा   लोटा ओके हाथ में, एगो कपड़ा साथ में दर-दर उ भटक रहल बा, रोटी के तलाश में समय से झगड़ा बा, आंख से लंगड़ा बा सबसे ओके आश बा , कुछ खाये…

  • कईसन बाड़ऽ तुऽ | Kaisan baral tu

    कईसन बाड़ऽ तुऽ ( Kaisan baral tu )    अपन घर छोड़ि के दूसरे के घर ताड़अ ताड़ऽ। कईसन बाड़ऽ तुऽ केहू के बात न मानऽ ताड़ऽ, लईका बह गईल, लईकनि बह गईलऽ खेत, मेड़ खलिहान दह गईल। तबहुं न सम्भल ताड़ऽ, कईसन बाड़ऽ तुऽ केहू के बात न मानऽ ताड़ऽ। मोंछि पर तॉव देऽ,…