Tag: Insan par kavita

  • तुम कैसा इंसान हो | Insan par kavita

    तुम कैसा इंसान हो ( Tum kaisa insan ho )    बांट बांट कर धरती सागर बांटते आसमान हो, तुम कैसा इंसान हो! जाति धर्म में रंग बटा है अब बांटते इमान हो, पशु भी बांटा पक्षी बांटा क्यूं बांटते श्मशान हो, तुम कैसा इंसान हो! भाषा बोली पुस्तक बांटा बांट रखे परिधान हो प्यार…

  • इंसान स्वयं को तू पहचान | Insan par kavita

    इंसान स्वयं को तू पहचान | Insan par kavita

    इंसान स्वयं को तू पहचान! ( Insan swayam ko to pehchaan )  ऐ इंसान स्वयं को तू पहचान! जन्म हुआ किस हेतु तुम्हारा ? इस दुनिया जहान में, मानव खुद को तू पहचान रे। पेश करो तू मानवता की मिशाल, टिकते वही धरा पर जिनके होते हृदय विशाल। ऐ इंसान स्वयं को तू पहचान, विनम्रता…