Tag: New kavita in Hindi
हमारे पूर्वज | Hamare Purvaj Kavita
हमारे पूर्वज ( Hamare purvaj ) परिवार की नींव है पूर्वज, संस्कारों के दाता है। वटवृक्ष की छांव सलोनी, बगिया को महकाता है। सुख समृद्धि जिनके दम से, घर में खुशियां आती। आशीशों का साया सिर पर, कली कली मुस्काती। घर के बड़े बुजुर्ग हमारे, संस्कारों भरी धरोहर है। धन संपदा क्या …
रात्रिकाल | Kavita
रात्रिकाल ( Raatrikaal ) दिन भर करते काम जो,अब हो आई शाम। थके थके से चल रहे, छोड़के सारा काम।। सूरज ढलने से हुई, ठंडी तपती धूप। रात सुहानी आ गई ,बिखरी छटा अनूप।। चूल्हा घर-घर जल रहा,रोशन घर परिवार। कोई पशु को नीरता, कर रहा सार संभार।। टिमटिम तारे कर…