मैं मजदूर हूं | Kavita main majdoor hun

मैं मजदूर हूं

( Main majdoor hun )

 

मैं मजदूर हूं ,मैं मजदूर हूं
रोटी रोजी के खातिर
घर से कितनी दूर हूं

 

मेहनत करना मेरा काम
भाग्य में लिखा कहां आराम
सेवाश्रम में चूर हूं ,मैं मजदूर हूं

 

पेट की भूख मिटाने को
घर का काम चलाने को
पैसे से मजबूर हूं ,मैं मजदूर हूं

 

जो मिल जाए खा लेता हूं
जीवन में कुछ गा लेता हूं
मन का अपने हुजूर हूं ,मैं मजदूर हूं

 

मेहनत ही मेरी भक्ति है
सेवा ही मेरी शक्ति है
कर्म से नहीं मैं दूर हूं ,मैं मजदूर हूं

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कवि : रुपेश कुमार यादव ” रूप ”
औराई, भदोही
( उत्तर प्रदेश।)

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