Kavita main majdoor hun

मैं मजदूर हूं | Kavita main majdoor hun

मैं मजदूर हूं

( Main majdoor hun )

 

मैं मजदूर हूं ,मैं मजदूर हूं
रोटी रोजी के खातिर
घर से कितनी दूर हूं

 

मेहनत करना मेरा काम
भाग्य में लिखा कहां आराम
सेवाश्रम में चूर हूं ,मैं मजदूर हूं

 

पेट की भूख मिटाने को
घर का काम चलाने को
पैसे से मजबूर हूं ,मैं मजदूर हूं

 

जो मिल जाए खा लेता हूं
जीवन में कुछ गा लेता हूं
मन का अपने हुजूर हूं ,मैं मजदूर हूं

 

मेहनत ही मेरी भक्ति है
सेवा ही मेरी शक्ति है
कर्म से नहीं मैं दूर हूं ,मैं मजदूर हूं

?

कवि : रुपेश कुमार यादव ” रूप ”
औराई, भदोही
( उत्तर प्रदेश।)

यह भी पढ़ें :-

मर्यादा की हानि | Poem maryada ki hani

 

 

Similar Posts

  • सुबह | Kavita Subah

    सुबह ( Subah ) अंधकार से उत्पन्न हुई एक किरण आकाश की गहराई से आई है। शिद्दत से प्रयास जारी रखकर, आशा की रोशनी संग मुसकाई है ।। ओस के सुखद स्पर्श से लबरेज पंछियों के कलरव सी मन को भाई है ।। सुबह की मंद मंद चल रही हवा पी के देस की महक…

  • गुस्ताखी | Gustakhi

    गुस्ताखी ( Gustakhi )    कलियों के भीतर यूं ही , आ नही जाती महक समूचे तने को ही , जमीं से अर्क खींचना होता है चंद सीढ़ियों की चढ़ाई से ही, ऊंचाई नही मिलती अनुभवों के दौर से गुजर कर ही, सीखना होता है सहयोग के अभाव मे कभी, मंजिल नही मिलती अकेले के…

  • जमाने में मेरा हाल | Zamane mein mera haal

    जमाने में मेरा हाल ( Zamane mein mera haal )   बदजात जमाने से मेरा हाल न पूछों जो जानना हो कुछ मेरे पास तुम आओ मैं बेहतर बताऊंगा दूसरे से यार न पूछों मैं चलता चला जाऊंगा फिर ठहर नही पाऊंगा दूसरे से मेरी मंजिल को मेरे यार न पूछो बदजात जमाने से मेरा…

  • गुरु | Guru par kavita in Hindi

    गुरु ( Guru )    गुरु तुम दीपक मैं अंधकार , किए हैं मुझपे आप उपकार,   पड़ा है मुझपर ज्ञान प्रकाश, बना है जीवन ये उपवास,   करें नित मुझ पर बस उपकार , सजे मेरा जीवन घर द्वार,   गुरु से मिले जो  ज्ञान नूर, हो जाऊं मैं जहां में मशहूर   गुरु…

  • इधर भी उधर भी

    इधर भी उधर भी ****** सब सम सा हो रहा है, लिए पताका कोई व्हाइट हाउस- तो कोई मस्जिद पर चढ़ रहा है। देता था जो दुनिया को जनतंत्र की दुहाई, चंद सिरफिरों ने उसकी करा दी जगहंसायी। देखो तो कैसे कैपिटल सिटी में? धमाके हो रहे हैं, मशालें लिए उस ऐतिहासिक इमारत पर- चढ़…

  • हमारे नेता जी

    हमारे नेता जी 23 जनवरी 1897 को कटक उड़ीसा में जन्म हुआ,जो पढ़ लिखकर अपने कला कौशल से अंबर छुआ।पिता जानकी नाथ बोस मां प्रभावती का पुत्र था जो,आजाद हिंद फौज बनाई और जय हिंद का नारा दिया।। देखकर भारत मां की दुर्दशा को बौखला गए नेताजी,1942 में आजाद हिंद फौज का गठन किए नेताजी…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *