रामलला | Ram Lala

रामलला!

( Ram Lala )

 

रामलला का गुण गाएँ रे,
चलो खुशियाँ मनाएँ।

दुल्हन के जैसी अयोध्या सजी है,
सोने के जैसे देखो तपी है।
हम भी तो सरयू नहायें रे,
चलो खुशियाँ मनाएँ।
रामलला का गुण गाएँ रे,
चलो खुशियाँ मनाएँ।

झन -झन कर रही उनकी पैजनियाँ,
चमचम-चमकी कमर करधनियाँ।
उनके चरणों में शीश झुकायें रे,
चलो खुशियाँ मनाएँ।
रामलला का गुण गाएँ रे,
चलो खुशियाँ मनाएँ।

दुनिया के मालिक अवध में विराजे,
जो कोई जावे सभी को नवाजें।
सीता मइया कै दर्शन भी पाएँ रे,
चलो खुशियाँ मनाएँ।
रामलला का गुण गाएँ रे,
चलो खुशियाँ मनाएँ।

जनम-जनम मुनि दर्शन न पावें,
मइया कौशल्या ऊ गोंदी खेलावें।
अपनी झोंपड़ी में राम को बुलाएँ रे,
चलो खुशियाँ मनाएँ।
रामलला का गुण गाएँ रे,
चलो खुशियाँ मनाएँ।

Ramakesh

रामकेश एम यादव (कवि, साहित्यकार)
( मुंबई )

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