दिल्ली की सड़क पे किसान है़

दिल्ली की सड़क पे किसान है़

 

 

दिल्ली की सड़क पे किसान है़!

यहां हर तरफ़ ये उफान है़

 

सुनी रहनुमा ने नहीं ज़बां

क़िस्मत के मारे किसान है़

 

करो मान इनका ए लोगों तुम

ये तो मुल्क के जय जवान है़

 

पुकारें सुन लो भी किसानों की

डूबी दर्द में ही जुबान है़

 

करो अन सुना मत किसानों को

  सुनो रहनुमा जो बयान है

 

मिटाते सबकी भूख ए लोगों

बोते फ़स्ल गेहूं ये धान है़

 

किसानों को ही  हक मिले सदा

आज़म देश की ये तो शान है़

 

 

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शायर: आज़म नैय्यर

(सहारनपुर )

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