Tag: साहित्य
उलझन | Hindi poetry on life
उलझन ( Uljhan ) उलझनों ने घेरा है, कैसा काल का फेरा है। किस्मत क्यों रूठ रही, मुसीबतों का डेरा है। जीवन की जंग लड़े, कदमों में शूल पड़े। मुश्किलें खड़ी थी द्वार, तूफानों से हम भीड़े। रिश्ते नाते भूले हम, मर्यादाएं तोड़ चले। बुजुर्ग माता-पिता को, वृद्धाश्रम छोड़ चले। विकास…
विदा | Kavita
विदा ( Vida ) तुम कह देना उन सब लोगों से, जिन्हें लगता है हम एक दुजे के लिए नहीं. जो देखते है सिर्फ़ रंग, रूप और रुतबा जिन्होंने नहीं देखा मेरे प्रेम की लाली को तुम्हारे गलो को भिगोते हुए. जो नहीं सुन पाए वो गीत जो मैंने कभी लफ़्ज़ों में पिरोए ही नहीं.…
Hindi Diwas Poem | मेरा सम्मान – मातृभाषा हिन्दी
मेरा सम्मान – मातृभाषा हिन्दी ( Mera samman – matribhasha Hindi ) कब तक हिंदी मंद रहेगी अग्रेजी से तंग रहेगी कब तक पूजोगे अतिथि को कब तक माँ यूँ त्रस्त रहेगी माना अग्रेजी की जरूरत सबको माना बिन इसके नहीं सुगम डगर हो माना मान सम्मान भी दिलवाती पर मातृ भाषा बिन कैसी…
बेटी | Kavita
बेटी ( Beti ) बेटी- है तो, माँ के अरमान है, बेटी- है तो, पिता को अभिमान है! बेटी- है तो, राखी का महत्त्व है, बेटी- है तो, मायका शब्द है! बेटी- है तो, डोली है, बेटी- है तो, बागों के झुले हैं! बेटी- है तो, ननद- भाभी की ठिठोली है! बेटी- है…
गुरुर ब्रहमा गुरुर विष्णु | Teacher’s Day Par Kavita
गुरुर ब्रहमा गुरुर विष्णु ( Gurur Brahma Gurur Vishnu ) जहाँ सिर श्रृद्धा से झुक जाते है अपने शिक्षक सभी याद आते हैं माँ मेरी प्रथम शिक्षिका है मेरी जीवन की वही रचियेता है पिता से धेर्य सीखा और सीखी स्थिरता चुपचाप जिम्मेदारी वहन करना और मधुरता दादी दादा नानी नाना से सीखा मिलजुल…
गुरु कुम्हार | Kavita
गुरु कुम्हार ( Guru kumhar ) गुरु कुम्हार शिष् कुंभ है गढ़ी गढ़ी कांठै खोट। अंतर हाथ सहार दे बाहर बाहे चोट। हर लेते हो दुख सारे खुशियों के फसल उगाते हो। अ से अनपढ़ ज्ञ से ज्ञानी बनाते हो। चांद पर पैर रखने की शिक्षा भली-भांति दे जाते हो। नेता, अभिनेता, डॉक्टर, इंजीनियर,…
दीवारों के कान | Geet
दीवारों के कान ( Geet : deewaron ke kaan ) कितने घर उजाड़े होंगे, सारे भेद ले जान। सारी दुनिया ढोल पीटते, दीवारों के कान। मन की बातें मन में रखना, सोच समझ ले इंसान। राम को वन में भिजवा दें, दीवारों के कान। कहीं मंथरा आ ना जाए, घर में कृपा…
श्री कृष्ण जन्माष्टमी विशेष (कजरी) | Shri Krishna Janmashtami vishesh
श्री कृष्ण जन्माष्टमी विशेष (कजरी) ( Shri Krishna Janmashtami vishesh – Kajri ) जनमे देवकी के जब लाला खुलिगा जेल का ताला ना …2 ll हाथों से हथकड़ियां छूटी मात पिता की बेड़ी टूटी खुल गए पाप के बंधन सारे आए जब नंदलाला ना…. जनमे देवकी ०… सो गए सारे पहरेदार खुल…
लीलाधारी श्रीकृष्ण | Kavita
“लीलाधारी श्रीकृष्ण” ( Leela Dhari Sri Krishna ) लीलाधारी श्री कृष्ण लीला अपरंपार आकर संकट दूर करो प्रभु हे जग के करतार लीलाधारी हे श्री कृष्णा चक्र सुदर्शन धारी हो माता यशोदा के गोपाला गोपियों के गिरधारी हो हे केशव माधव दामोदर सखा सुदामा सुखदाता अगम अगोचर अविनाशी जगकर्ता विश्व विधाता …
आया राखी का त्यौहार | Geet rakhi par
आया राखी का त्यौहार ( Aaya rakhi ka tyohar ) आया राखी का त्यौहार आया राखी का त्यौहार कलाई पर बांध रही है बहना लेकर हर्ष अपार आया राखी का त्यौहार एक रेशम की डोर लाई, बहना छम छम करती आई। चंदन तिलक लगा माथे पर, बहना करती मंगलाचार। आया राखी का त्यौहार महक रहा…