जबसे नजरें मिला के रखा है | Nazre Shayari

जबसे नजरें मिला के रखा है

( Jab se nazre mila ke rakha hai )

 

जबसे नजरें मिला के रखा है।
हाल  कैसी  बना  के रखा है।।

बहार  बनके  तुम  चले  आते,
हमने गुलशन सजा के रखा है।।

डूब जायेगा तेरा सारा ज़मीर
इतने आंसू बहा के रखा है।।

कोई  रकीब  ही  दुवा  कर  दे,
दोस्त को आजमा के रखा है।।

रौशनी अर्श तक जायेगी जरूर,
दिया दिल का जला के रखा है।।

भीड़ कांटों की लम्बी थी मगर,
‘शेष’  दामन  बचा के रखा है।।

कवि व शायर: शेष मणि शर्मा “इलाहाबादी”
प्रा०वि०-नक्कूपुर, वि०खं०-छानबे, जनपद
मीरजापुर ( उत्तर प्रदेश )

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