Category: छंद
करवा चौथ | Chhand karva chauth
करवा चौथ ( Karva chauth ) सुहागनें नारी सारी, करवा चौथ मनायें। कर सोलह श्रंगार, गौरी चांद मना रही। मनमीत प्रियतम, प्राण प्यारे भरतार। लंबी जीए उम्र जग, मंगल कामना कहीं। दिलों का पावन रिश्ता, टूटे ना तकरार से। प्रीत का झरना बहे, प्रेम की सरिता बही। धवल चांदनी सुधा, उमड़ा सागर प्रेम। पिया…
बेटी पढ़ाओ बेटी बचाओ | Chhand Beti Bachao Beti Padhao
बेटी पढ़ाओ बेटी बचाओ ( Beti Bachao Beti Padhao ) मत मारो मां कोख में, चिड़िया सी उड़ जाऊं। रह लूंगी भूखी प्यासी, जन्म लेने दीजिए। बेटी घर का मान है, मात पिता अभिमान। उड़ाने भरे आसमां, थोड़ा प्यार कीजिए। घर श्मशान सा लगे, जहां विरान सा लगे। बेटियां करें रोशन, मुस्कान…
शालीनता | देव घनाक्षरी | Chhand Shalinta
शालीनता ( Shalinta ) शालीनता सुशीलता सौम्य स्वभाव बनाए संस्कार हमारे शुभ हो कीर्ति पताका गगन विनय धीरज धर भाव विमल धार लो उर आनंद बरसे हरसे मन का चमन बहती पावन गंगा प्रेम सिंधु ले हिलोरे सत्कार मिले सबको, कर जोड़ करें नमन सुंदर सी सोच रख विनम्र हो भाव…
साथी | छंद
साथी ( Sathi ) मनहरण घनाक्षरी वृंदावन सा हृदय, गोकुल सा मन मेरा। बजे बंशी मोहन की, झूम झूम गाइये। आंधी तूफां मुश्किलों का, सुख सागर हो जाना। मन भाती प्रीत साथी, मनमीत आइए। महका मधुमास सा, प्यार के मोती लुटाता। तेरा मेरा प्रेम सच्चा, रस बरसाइये। सद्भाव प्रेम आनंद से, तय सफर हो…
स्कंदमाता | माहिया छंद
स्कंदमाता ( Skandmata ) स्कंदमाता कल्याणी पर्वत निवासिनी रक्षा करें दुर्गा मां गूंजता दरबार मां जयकार हो रही जले अखंड ज्योत मां यश वैभवदात्री दो वरदान भवानी सुनो महागौरी मां जय माता जगदंबे मां शेरावाली आओ दानव दलनी दुर्गा माता रानी कमल नयन वाली मां जगत की करतार तुम…
Chhand Shailputri | शैलपुत्री
शैलपुत्री मनहरण घनाक्षरी शैलपुत्री वृषारूढ़ा, गिरिराज प्रिय सुता। त्रिशूलधारी भवानी, दुख हर लीजिए। मंगलकारणी माता, दुखहर्ता सुखदाता। कमल नयनी देवी, वरदान दीजिए। पार्वती मां हेमवती, शिव गौरी जगदंबे। यश कीर्ति वैभव दो, माता कृपा कीजिए। सजा दरबार तेरा, अखंड ज्योति जलती। शक्ति स्वरूपा अंबे, शरण में लीजिए। रचनाकार : रमाकांत…
भीनी भीनी चांदनी | Chhand bhini bhini chandni
भीनी भीनी चांदनी ( Bhini bhini chandni ) विधा मनहरण घनाक्षरी उज्जवल उज्जवल, भीनी भीनी मद्धम सी। दूधिया सी भीगो रही, दिव्य भीनी चांदनी। धवल आभा बरस, सुधा रस बांट रही। आनंद का अहसास, देती भीनी चांदनी। चांद यूं छलका रहा, अमृत रस भंडार। हर्ष खुशी मोद करे, दुलार भीनी चांदनी।…
चिंता | Chhand chinta
चिंता ( Chinta ) मनहरण घनाक्षरी चिंता चिता समान है, तन का करें विनाश खुशियों से झोली भरे, थोड़ा मुस्कुराइए। छोड़ो चिंता जागो प्यारे, खुशियां खड़ी है द्वारे। हंसो हंसाओ सबको, माहौल बनाइए। अंतर्मन जलाती है, आत्मा को ये रुलाती है। अधरो की मुस्कानों को, होंठों तक लाइए। मत कर चिंता…
गजानंद | Chhand Gajanand
गजानंद ( Gajanand ) मनहरण घनाक्षरी गजानंद गौरी सुत, गणपति गणराज। विघ्नहर्ता पीर हरे, गणेश मनाइए। आय पधारो देव हे, एकदंत विनायक। रिद्धि-सिद्धि संग प्रभु, लंबोदर आइए। प्रथम पूज्य देव हे, संकटमोचन नाथ। यश कीर्ति वैभव दे, निशदिन ध्याइये। सुख समृद्धि प्रदाता, श्री गणेश महाराज। मूषक वाहन सोहे, मोदक चढ़ाइए।…
शिव | Shiva | Chhand
शिव ( Shiva ) मनहरण घनाक्षरी नाग वासुकी लपेटे, गले सर्प की माला है। त्रिनेत्र त्रिशूलधारी, शंकर मनाइए। डमरु कर में लिए, नटराज नृत्य करें। चंद्रमा शीश पे सोहे, हर हर गाइये। जटा गंगधारा बहे, कैलाश पे वासा प्रभु। गोरी संग गणेश को, बारंबार ध्याइये। त्रिपुरारी शिव भोले, शंकर दया निधान।…