Chhand shalinta

शालीनता | देव घनाक्षरी | Chhand Shalinta

शालीनता

( Shalinta )

 

शालीनता सुशीलता
सौम्य स्वभाव बनाए
संस्कार हमारे शुभ
हो कीर्ति पताका गगन

 

विनय धीरज धर
भाव विमल धार लो
उर आनंद बरसे
हरसे मन का चमन

 

बहती पावन गंगा
प्रेम सिंधु ले हिलोरे
सत्कार मिले सबको,
कर जोड़ करें नमन

 

सुंदर सी सोच रख
विनम्र हो भाव प्यारे
दमके ललाट सारा
दिव्य ज्योति बन चंदन।

?

रचनाकार : रमाकांत सोनी सुदर्शन

नवलगढ़ जिला झुंझुनू

( राजस्थान )

यह भी पढ़ें :-

साथी | छंद

 

 

 

 

Similar Posts

  • दया | Daya

    दया ( Daya ) रूप घनाक्षरी   जीवों पर दया करें, औरों पर उपकार। साथ देता भगवन, दुनिया का करतार। हर्ष खुशी प्रेम भरा, सुंदर सा ये संसार। दया नहीं मन माहीं, समझो जीना बेकार। श्रीराम है दयासिंधु, भक्तों के तारणहार। दयानिधि दीनबंधु, कर देते बेड़ा पार। दीनन पे दया करें, आदर और सत्कार। सुख…

  • उपवास | Upwas chhand

    उपवास ( Upwas ) मनहरण घनाक्षरी   नेम धर्म व्रत करे विश्वास श्रद्धा भाव से प्रभु सुमिरन कर उपवास कीजिए   जब तप योग ध्यान सर्व शक्ति हरि मान दुर्गुण दोष मन से त्याग सुधा दीजिए   मन से करें जो पूजा व्रत निराहार रख कामना पूरी कर दे माला जप लीजिए   उपवास बड़ा…

  • श्रीकृष्ण | Shri Krishna chhand

    श्रीकृष्ण ( Shri Krishna )   मनहरण घनाक्षरी   माधव मुरली वाले, गोकुल के घनश्याम। नंदलाल गिरधारी, लीलायें रचाइये।   यशोदा के राजदुलारे, जन जन के सहारे। चक्र सुदर्शन धारी, मुरली बजाइए।   राधा के मोहन प्यारे, जग के तारणहारे। जय हो तेरी केशव, विपद निवारिये।   सखा सुदामा हे कृष्णा, करुणासागर कान्हा। भक्तों के…

  • कण कण पाए हरि | Narayan Hari

    कण कण पाए हरि ( Kan kan paye hari ) हरिहरण घनाक्षरी   घट घट वासी हरि, रग रग बसे हरि। रोम रोम रहे हरि, सांस सांस मिले हरि। कण कण पाए हरि, जन मन भाए हरि। घर घर आए हरि,भजो राम हरि हरि। पीर हर लेते हरि, भव पार करे हरि। यश कीर्ति देते…

  • रोजगार | Rojgar chhand

    रोजगार ( Rojgar ) मनहरण घनाक्षरी छंद   रोजगार नौकरी हो, कारोबार कारीगरी।। कौशल कलायें कई, काज शुभ कीजिए।।   नौकरी या व्यवसाय, रोजगार काज करो। परिवार फले फूले, ऐसा काम कीजिए।।   हर हाथ काम मिले, यश कीर्ति नाम मिले। दुनिया में काम वही, बढ़चढ़ कीजिए।।   काम कोई छोटा नहीं, कर्मठ को टोटा…

  • जग से निराला लगे,

    जग से निराला लगे रूप घनाक्षरीमनमीत-8,8,8,8चरणांत -21 जग से निराला लगे,सबसे ही प्यारा लगे,छेड़े जब प्रेम धुन,वह राग मनमीत । मुख आभा लगे ऐसी,पूनम के चाॅ॑द जैसी,मुख शोभित लालिमा,ज्यों रजनी चाॅ॑दप्रीत । दीप उजियार करे,घर की है शोभा बढ़े,दमक रहे जुगनू,ऐसे लगे नैन जीत । अजब सी लीला देखो,प्रेम रस जरा चखो,कहे फिर सारा जग,है…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *