काशी विश्वनाथ मंदिर के रोचक तथ्य

“ऊं नमः पार्वतीपतये
हर हर महादेव “
“शिव सृजन है और विनाश भी
शिव मंदिर है और श्मशान भी
शिव आदि हैं और अनंत भी
मेरे महादेव ही स्वर्ग है, महादेव ही मोक्ष हैं “


काशी विश्वनाथ मंदिर बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है। काशी विश्वनाथ मंदिर का हिंदू धर्म में एक विशिष्ट स्थान है। ऐसा माना जाता है कि एक बार इस मंदिर के दर्शन करने और पवित्र गंगा में स्नान कर लेने से मोक्ष की प्राप्ति होती है।
काशी विश्वनाथ मंदिर को स्वर्ण मंदिर कहा जाता है। मंदिर के ऊपर सोने के गुंबद लगे हुए हैं। इस मंदिर के लिए सोना पंजाब के सिख महाराजा रणजीत सिंह ने दान दिया था।

काशी विश्वनाथ मंदिर के अंदर शिव, विशेश्वर का ज्योतिर्लिंग है। विश्वेश्वर ज्योतिर्लिंग का भारत के आध्यात्मिक इतिहास में बहुत ही विशिष्ट और अद्वितीय महत्व है।

पौराणिक लिखित वर्णन के अनुसार देवी पार्वती अपने पिता के घर हिमालय पर रहती थी। एक बार की बात है, माता पार्वती ने भगवान महादेव से कहा कि अब हमें अपने घर चलना है। इसके बाद भगवान महादेव ने माता पार्वती को अपने साथ लेकर काशी आए और भगवान विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग के रूप में खुद को यहां विराजमान कर लिए। श्री काशी विश्वनाथ मंदिर बाबा विश्वनाथ और माता पार्वती का आदि स्थान है।

श्री काशी विश्वनाथ को आदि विशेश्वर भी कहा जाता है। श्री काशी विश्वनाथ का उल्लेख महाभारत और उपनिषद में भी किया गया है

“आओ चलें, सब मिलकर चलें
शिव की नगरी चलें
काशी नगरी, ये है सुंदर नगरी
पावन नगरी जहां जीवन मोक्ष मिले
आओ चलें, सब मिलकर चलें
शिव की नगरी चलें”

ऐसा माना जाता है कि भगवान शिव गंगा के किनारे इस नगरी में निवास करते हैं। उनके त्रिशूल की नोक पर काशी बसी हुई है। भगवान शिव काशी के पालक और संरक्षक हैं, जो यहां के लोगों की रक्षा करते हैं। काशी विश्वनाथ मंदिर के ऊपर एक सोने का छात्र लगा हुआ है। ऐसी मान्यता है कि इस छत्र के दर्शन से लोगों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है। बाबा विश्वनाथ की नगरी काशी के बारे में एक और बात कही जाती है की जब पृथ्वी का निर्माण हुआ तो सूर्य की पहली किरण काशी पर ही पड़ी थी।

“हे महादेव! हे भोले बाबा ऐसी शक्ति भर दो भर दो
नैतिकता का पतन हो रहा है संस्कार के स्वर भर दो”

काशी नगरी को मोक्ष की नगरी भी कहा जाता है। मान्यता है कि बाबा विश्वनाथ के दरबार में उपस्थिति मात्र से ही भक्त को जन्म-जन्मांतर के चक्र से मुक्ति मिल जाती है। सावन के महीने में बाबा विश्वनाथ के दरबार में हाजिरी लगाने के लिए देश-विदेश से लोग आते हैं। उसे दौरान अभिषेक से भगवान शिव जल्द प्रसन्न होते हैं और भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं।

“जयति जय शिव करते हैं अभिनंदन
सत्य ही शिव है शिव ही सुंदरम
शिव की करते हम मन से प्रार्थना
पूरी करते वह सभी मनोकामना”

इस मंदिर को आक्रमण कार्यो ने कई बार निशाना बनाया। मुगल सम्राट अकबर ने प्राचीन मंदिर को दोबारा बनवाने का आदेश दिया था, जिसे बाद में औरंगजेब ने तोड़वा डाला। वहां पर उसने मस्जिद का निर्माण करवाया, जो ज्ञानवापी मस्जिद के नाम से जाना जाता है। बताया जाता है कि लोगों को जब पता चला कि औरंगज़ेब इस मंदिर को तोड़ना चाहता है तो भगवान शिव के ज्योतिर्लिंग को एक कुएं में छुपा दिया गया। वह कुआं आज भी मंदिर और मस्जिद के बीच में स्थित है।

“धड़कन काशी हो गई नयन बनारस प्यास,
मन में बस विश्वनाथ बसें बाबा दर्शन की आस,
मन में बसे बनारस, दिल में बसे बाबा विश्वनाथ”

श्रीमती उमेश नाग

जयपुर, राजस्थान

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