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संसय

संसय ( Sansaya Kavita)     मन के रावण को मारे जो, राम वही बन पाएगा, वरना सीता  को रावण से, कैसे  कौन  बचाएगा।     कुछ नर में रावण बसते है,...

बीते लम्हें

बीते लम्हें ( Beete Lamhen Kavita )      मैने पाया  बहुत, मैने  खोया बहुत। जिन्दगी तेरे दर , मैने  रोया  बहुत।   ख्वाब मैने बुना, जो हुआ सच मगर। वो मुकम्मिल...

उल्फ़त की सर्दी लग गयी है मुझे

उल्फ़त की सर्दी लग गयी है मुझे   ( Ulfat Ki Sardi Lag Gayee Hai Mujhe )     उल्फ़त की सर्दी लग गयी है मुझे! अब महसूस वो हो...

तांडव ( फ़िल्म समीक्षा )

तांडव ( फ़िल्म समीक्षा ) ( Tandav - Film Review )   "तांडव" देखी। राजनीति का फुल डोज है इसमें। यद्यपि यह आते ही विवादों में उलझ...

जंगल में चुनाव

जंगल में चुनाव ( व्यंग्यात्मक लघुकथा ) ( Jangal Mein Chunav )   शहर की भीड़-भाड़ से दूर जंगल में एक शेर रहता था।जिसका नाम शेर ख़ान था।अब...

कैसे-कैसे लोग

कैसे-कैसे लोग ( Kaise-Kaise Log )     अक्ल के कितने अंधे लोग। करते क्या-क्या धंधे लोग।   मासूमों के खून से खेले, काम भी करते गंदे लोग।   रौब जमा के अबलाओं पर, बनते...

बावरा मन

बावरा मन ( Bawara Man )     बावरा   मन   मेरा,  हर  पल  ढूंढे   तुमको। नैना द्वारे को  निहारे, एकटक देखे  तुमको।   प्रीत  कहते  है  इसे, या  कि कोई रोग...

खिल रहा वो फ़ूल गुलाब का

खिल रहा वो फ़ूल गुलाब का ( Khil Raha Wo Phool Gulab Ka )     खिल रहा वो  फ़ूल गुलाब का ! हुस्न हो जैसे आफ़ताब का   इक खिला...

नारी

नारी ( Nari Kavita )   नर से धीर है नारी ... घर में दबी बेचारी , कभी बेटी कभी बहू बने , कभी सास बन खूब तने, एक ही जीवन...

वहां पर कब भला मिलता है सच्चा प्यार जीवन में

वहां पर कब भला मिलता है सच्चा प्यार जीवन में (Wahan Par Kab Bhala Milta Hai Sacha Pyar Jeevan Mein )     वहां पर कब भला मिलता...