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TheSahitya – द साहित्य
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TheSahitya – द साहित्य
  • अख़बारों में साहित्य की हत्या और शब्दकर्मियों की बेइज़्ज़ती
    आलेख

    अख़बारों में साहित्य की हत्या और शब्दकर्मियों की बेइज़्ज़ती

    ByAdmin July 20, 2025July 20, 2025

    आज के अधिकांश अख़बारों से साहित्यिक पन्ने या तो पूरी तरह गायब हो चुके हैं या केवल खानापूरी तक सीमित हैं। लेखकों को छापकर उन्हें ‘कृपा’ का अनुभव कराया जाता है, परंतु सम्मानजनक मानदेय नहीं दिया जाता। अब कुछ मालिकान पुरस्कार योजनाएं बनाकर लेखक-सम्मान का दिखावा कर रहे हैं, जबकि बुनियादी ज़रूरत है — श्रम…

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  • जीवन मे सफलता के सिद्धांत प्रतिस्पर्धा एव धैर्य
    आलेख

    जीवन मे सफलता के सिद्धांत प्रतिस्पर्धा एव धैर्य

    ByAdmin July 20, 2025July 20, 2025

    प्रतिस्पर्धा ,चुनौती जिन्दंगी के जंग का हिस्सा है जिंदगी जंग है जिंदगी मीत है, जिंदगी खुद की है ,जिंदगी खुद की दुश्मन भी है । तात्पर्य स्पष्ठ है जिंदगी जीने के अंदाज़ पर निर्भर करती है।चाहे आप जो भी कार्य करते है वहां प्रतिस्पर्धा चुनौती से अवसर एव उपलब्धि दोनों उपलब्ध कराती है। कभी सामान…

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  • परमात्मा और परमार्थ
    आलेख

    परमात्मा और परमार्थ

    ByAdmin July 19, 2025July 19, 2025

    परमात्मा वास्तव में आत्मा कि परम यात्रा का ही सत्यार्थ है या कुछ अन्य आत्मा किवास्तविकता शोध का विषय है या नही अपने आप मे बड़ा प्रश्न है ? आत्मा परमात्मा दोनों के शाब्दिक विवेचना में सिर्फ परम का ही प्रत्यंतर है आत्मा कि परम स्थिति ही परमात्मा कि प्रमाणिकता है ? परम स्थिति क्या…

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  • अथ कुम्भ मोक्ष मार्ग सत्यार्थ
    आलेख

    अथ कुम्भ मोक्ष मार्ग सत्यार्थ

    ByAdmin July 17, 2025July 17, 2025

    (अ) पौराणिक कुम्भ कथा- सनातन की सिंद्धान्तों के सुंदर लोककल्याण एव लोकवोत्सव कि परम्पराओ में कुम्भ एक महत्वपूर्ण पड़ाव एव आयोजन है जो नियमित रूप से प्रत्येक चार वर्षों पर के अंतराल में हरिद्वार ,प्रयाग ,उज्जैन एव नासिक में आयोजित होता है। आर्थत बारह वर्षों के अंतराल में कुम्भ स्नान का आयोजन भारत की पवित्र…

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  • कागा की कलम
    कविताएँ

    विचार-धारा

    ByAdmin July 17, 2025September 1, 2025

    सच्चाई कौन दोस्त कौन दुश्मन फ़र्क़ नहीं पड़ता,कौन अपना कौन पराया फ़र्क़ नहीं पड़ता। हम चले मंज़िल की ओर एकदम अकेले,कौन रहबर कौन रहज़न फ़र्क़ नहीं पड़ता। सोच में सपने संजोये भावी भविष्य के,कौन नाकाम कौन कामयाब फ़र्क़ नहीं पड़ता। नक्कमे करते नुक्ताचीनी हर किसी काम में,कौन नेक कौन नादान फ़र्क नहीं पड़ता। करते जो…

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  • शादी का चौथा फेरा
    कहानियां

    शादी का चौथा फेरा

    ByAdmin July 17, 2025July 17, 2025

    सुहागरात की अगली सुबह प्रातः 6:00 बजे जैसे ही नई नवेली दुल्हन शीतल की आंख खुली, तो उसने अपने पति वीर सिंह को अपने करीब ना पाया। कुछ देर तक वह अपने पति का इंतजार करती रही। उसे लगा कि शायद मेरे पति दैनिक क्रियाकलापों से निवृत होकर बाहर घूमने गए हैं, कुछ देर में…

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  • दिमागी रेबीज यानी इंसान से दूरी, कुत्ते से करीबी
    आलेख

    दिमागी रेबीज यानी इंसान से दूरी, कुत्ते से करीबी

    ByAdmin July 17, 2025July 17, 2025

    हम एक ऐसे समय में जी रहे हैं जहाँ लोग अपनी मां को वृद्धाश्रम छोड़ आते हैं, लेकिन कुत्तों के लिए मखमली बिस्तर खरीदते हैं। जहाँ बच्चे की फीस चुकाना कठिन होता है, पर पालतू जानवर के लिए सालगिरह पार्टी देना ‘प्यारा’ माना जाता है। यह वह युग है जहाँ संवेदना की दिशा बदली है,…

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  • काशी विश्वनाथ मंदिर के रोचक तथ्य
    आलेख

    काशी विश्वनाथ मंदिर के रोचक तथ्य

    ByAdmin July 17, 2025July 17, 2025

    “ऊं नमः पार्वतीपतयेहर हर महादेव ““शिव सृजन है और विनाश भीशिव मंदिर है और श्मशान भीशिव आदि हैं और अनंत भीमेरे महादेव ही स्वर्ग है, महादेव ही मोक्ष हैं “ काशी विश्वनाथ मंदिर बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है। काशी विश्वनाथ मंदिर का हिंदू धर्म में एक विशिष्ट स्थान है। ऐसा माना जाता है कि…

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  • नर नारायण
    आलेख

    नर नारायण

    ByAdmin July 17, 2025July 17, 2025

    ब्रह्मांड के दो प्रमुख अवयव है जो परब्रम्ह परमात्मा कि कल्पना रचना कि वास्तविकता है प्रथम प्रकृति हैजो ब्रह्मांड का आधार है जिसमे पंच तत्व महाभूतों का सत्यार्थ परिलक्षित है जिसका प्रवाह पवन,पावक ,शून्य (आकाश) स्थूल (पृथ्वी) जल प्रावाह का सत्य है इन्ही के आधार पर प्राण का अस्तित्व निर्धारित होता है । प्राण को…

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  • Sant Kabir Das
    आलेख

    कबीर जन्मोत्सव विशेष

    ByAdmin July 16, 2025July 17, 2025

    कबीर दास जी का जन्म वर्ग जाती के सूत्रपात या उत्कर्ष काल में नहीं हुआ था!कबीर दास जी सन 1398 में बालक रूप में लहरतारा तालाब पर पाए गए थे तत्कालीन समय तैमूर लंग कि क्रूरता से भारत वर्ष त्रस्त ससंकित भयाक्रांत था और भरतीय समाज अपनी रक्षा कि आस में दर बदर भटक रहा…

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