आईना

  • आईना

    आईना आईना बनकर लोगों के अक्स हूं दिखाता बहुत साधारण और हूं सादा न दिखाता कभी कम न ज्यादा जो है दिखता हू-ब-हू वही हूं दिखाता। लेकिन न जाने क्यों? किसी को न सुहाता? जाने ऐसा क्या सबको है हो जाता? तोड़ लेते हैं झट मुझसे नाता! होकर तन्हा कभी हूं सोचता कभी पछताता मैं…

  • आईना | Aaina kavita

    “आईना” ( Aaina : kavita ) –> सच्चाई का प्रतीक है “आईना” || 1.सब कहते हैं सच्चा-झूँठा, किस पर यकीन करें | देख कर चेहरा बातें करते, किस पर यकीन करें | किसके दिल मे क्या रहता, कुछ पता नहीं चलता है | एक आईना झूँठा न बोले, जो सच है सो कहता है |…