Tag: धरती

  • धरती | मनहरण घनाक्षरी

    धरती ( Dharti )   हरी भरी प्यारी धरा, वीर प्रसूता अवनी। हरियाली भरपूर, धरती पे लाइए। महकती बहारों से, कुदरती नजारों से। पुष्प धरा की सौरभ, समां महकाइए। धरती अंबर तारे, पर्वत नदिया सारे। ओढ़े धानी चुनरिया, धरा को संवारिए। वसुंधरा वीर भूमि, गौरव से खूब झूमीं। मातृभूमि है हमारी, गुणगान गाइए। कवि : रमाकांत…

  • सावन | Swan kavita

    सावन | Swan kavita

    सावन  ( Sawan )   –> आया सावन झूमते, धरती को यूं चूमते || 1.फूल खिल रहे बगियन में, रंग बिरंगे तरह-तरह | बादलों में बिजली चमके, रिम-झिम बरसे जगह-जगह | कहीं मूसलाधार हो बारिश, टिम-टिम बरसे कहीं-कहीं | कोई कहता रुक जा मालिक, कहता कोई नहीं-नहीं | –>आया सावन झूमते, धरती को यूं चूमते…

  • किस्मत | Kismat kavita

    किस्मत | Kismat kavita

     किस्मत  ( Kismat )     ->अपना काम करता चल ……..|| 1.लोगों की भलाई कर भूल जा, उस पर फिर विचार ना कर | आगे चलकर जरूर मिलेगा तुझे, उसका इंतजार न कर | तेरा साथ पाने वाला भूल जाए, तो कोई ऐतराज न कर | देख रहा है कोई अद्रश्य रुप से, खुद को…