धरती | मनहरण घनाक्षरी

धरती

( Dharti )

 

हरी भरी प्यारी धरा, वीर प्रसूता अवनी।
हरियाली भरपूर, धरती पे लाइए।

महकती बहारों से, कुदरती नजारों से।
पुष्प धरा की सौरभ, समां महकाइए।

धरती अंबर तारे, पर्वत नदिया सारे।
ओढ़े धानी चुनरिया, धरा को संवारिए।

वसुंधरा वीर भूमि, गौरव से खूब झूमीं।
मातृभूमि है हमारी, गुणगान गाइए।

कवि : रमाकांत सोनी

नवलगढ़ जिला झुंझुनू

( राजस्थान )

यह भी पढ़ें :

रमाकांत सोनी की कविताएं | Ramakant Soni Hindi Poetry

Similar Posts

  • तुलसीदास जी | Chhand Tulsidas Ji

    तुलसीदास जी ( Tulsidas Ji ) मनहरण घनाक्षरी   तुलसी प्यारे रामजी, राम की कथा प्यारी थी। प्यारा राम रूप अति, रामलीला न्यारी थी।   राम काव्य राम छवि, नैनों में तुलसीदास। रामचरितमानस, राम कृपा भारी थी।   चित्रकूट चले संत, दर्शन को रघुनाथ। रामघाट तुलसी ने, छवि यूं निहारी थी।   राम नाम रत…

  • भक्त प्रह्लाद | Bhakt Prahlad

    भक्त प्रह्लाद ( Bhakt prahlad )     होलिका भी जल गई, प्रह्लाद को भर गोद, हर्ष जग में छा गया, सब होली मनाइए।   सद्भाव की घटाएं भी, लाई रंगों की बहार, घट घट हर्ष छाया, मस्त होकर गाइए।   सच्चे भक्त प्रह्लाद जो, प्रभु का करते ध्यान, दीनानाथ रक्षा करें, हरि ध्यान लगाइए।…

  • वृद्धाश्रम | Bridhashram Chhand

    वृद्धाश्रम ( Bridhashram )   मनहरण घनाक्षरी   पावन सा तीर्थ स्थल, अनुभवों का खजाना। बुजुर्गों का आश्रय है, वृद्धाश्रम आइए।   बुजुर्ग माता-पिता को, सुत दिखाते नयन। वटवृक्ष सी वो छाया, कभी ना सताइए।   हिल मिलकर सभी, करें सबका सम्मान। वृद्धाश्रम में प्रेम के, प्रसून खिलाइए।   जीवन के अनुभव, ज्ञान का सागर…

  • सावन सुहाना आया | छंद

    सावन सुहाना आया | Chhand ( Sawan suhana aya ) (  मनहरण घनाक्षरी छंद )   सावन सुहाना आया, आई रुत सुहानी रे। बरसो बरसो मेघा, बरसाओ पानी रे।   बदरा गगन छाए, काले काले मेघा आये। मोर पपीहा कोयल, झूमे नाचे गाए रे।   रिमझिम रिमझिम, बरखा बहार आई। मौसम सुहाना आया, हरियाली छाई…

  • शालीनता | देव घनाक्षरी | Chhand Shalinta

    शालीनता ( Shalinta )   शालीनता सुशीलता सौम्य स्वभाव बनाए संस्कार हमारे शुभ हो कीर्ति पताका गगन   विनय धीरज धर भाव विमल धार लो उर आनंद बरसे हरसे मन का चमन   बहती पावन गंगा प्रेम सिंधु ले हिलोरे सत्कार मिले सबको, कर जोड़ करें नमन   सुंदर सी सोच रख विनम्र हो भाव…

  • शीश शिव गंगा धरे

    शीश शिव गंगा धरे ( छन्द : मनहरण घनाक्षरी ) शीश शिव गंगा धरे ,सब ताप कष्ट हरे,जप नाम शिव प्यारे ,तब होगे काम रे!!!शिव पूजा सब करे ,आज होगे काज पूरे,गुंज रहा सारी सृष्टी,सदाशिव नाम रे !!!शिव प्रिय बिल्व फल ,भक्त लिये गंगाजल,प्रभुल्लित सब चले ,शिवाप्रिया धाम रे !!!शिव पर्व जब आया ,साथ सब…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *