धरती | मनहरण घनाक्षरी

धरती

( Dharti )

 

हरी भरी प्यारी धरा, वीर प्रसूता अवनी।
हरियाली भरपूर, धरती पे लाइए।

महकती बहारों से, कुदरती नजारों से।
पुष्प धरा की सौरभ, समां महकाइए।

धरती अंबर तारे, पर्वत नदिया सारे।
ओढ़े धानी चुनरिया, धरा को संवारिए।

वसुंधरा वीर भूमि, गौरव से खूब झूमीं।
मातृभूमि है हमारी, गुणगान गाइए।

कवि : रमाकांत सोनी

नवलगढ़ जिला झुंझुनू

( राजस्थान )

यह भी पढ़ें :

रमाकांत सोनी की कविताएं | Ramakant Soni Hindi Poetry

Similar Posts

  • गाँव | Gaon par chhand

    गाँव ( Gaon ) मनहरण घनाक्षरी   टेडी मेडी पगडंडी, खलिहानों की वो क्यारी। ठंडी-ठंडी बहारों में, गांव चले आइए।   मीठे मीठे बोल मिले, सद्भाव प्रेम गांव में। हरे भरे पेड़ पौधे, ठंडी छांव पाइए।   खुली हवा में सांस लो, हरियाली का आनंद। चौपाल में चर्चा चले, प्रेम बरसाइये।   सुख-दुख बांटे सब,…

  • करवा चौथ | Chhand karva chauth

    करवा चौथ ( Karva chauth )   सुहागनें नारी सारी, करवा चौथ मनायें। कर सोलह श्रंगार, गौरी चांद मना रही। मनमीत प्रियतम, प्राण प्यारे भरतार। लंबी जीए उम्र जग, मंगल कामना कहीं। दिलों का पावन रिश्ता, टूटे ना तकरार से। प्रीत का झरना बहे, प्रेम की सरिता बही। धवल चांदनी सुधा, उमड़ा सागर प्रेम। पिया…

  • नवदुर्गा उपासना | Navdurga Upasana

    नवदुर्गा उपासना ( मनहरण घनाक्षरी ) नाम नव दुर्गा रूप, पूजे सुर मुनि भूपपहाड़ों वाली मां तेरा, शैलपुत्री नाम है। दूसरा अनूप रूप, ब्रह्मचारिणी है मैयाकमंडल कर तेरे, दूजे कर माल है। चंद्रघंटा रूप तेरा, तीसरा सलोना मैया,सिंह की सवारी तेरे, हाथ में कमान है। चौथा है कुष्मांडा रूप, पांचवा स्कंद मैया,छठा है कात्यायनी मां,…

  • परीक्षा | Pareeksha par Chhand

    परीक्षा ( Pareeksha )   पग पग पे परीक्षा, लेता जग करतार। जीवन की डगर पे, चलिए जरा संभल। हर आंधी तूफां से, हर मुश्किल बाधा से। हौसलों की उड़ान से, छूएं आसमा नवल। घड़ी-घड़ी धैर्य धर, हर छानबीन कर। रिश्तो को परख कर, साख रखिए धवल। जिंदगी की जंग लड़े, उन्नति पथ पे बढ़े।…

  • यामिनी छंद : सममात्रिकनवाक्षरी

    जन्म का खादर जन्म का खादर l घूमती घाघर lआखिरी आदर l ओढ़ ली चादर lक्रोध पारायण l बाँच रामायण lदम्भ भंडारण, l कब मरा रावण l आज भी जीवित l नारियाँ क्षोभित lयत्न सब रोधित l कब हुए शोधित lलोभ से लोभित l रूप पर मोहित lहो रहे क्रोधित l चेतना लोहित ll बेटियाँ…

  • स्कूल चले हम | School chale hum | Chhand

    स्कूल चले हम ( School chale hum )   मनहरण घनाक्षरी   आओ स्कूल चले हम, होकर तैयार चले। पढ़ने को लेकर बस्ता, पाठशाला जा रहे।   खुल गई स्कूले सारी, मोटी मोटी फीस भारी। कापी किताबें लेकर, पढ़ने को जा रहे।   समय पर जगना, समय पर ही सोना। पहन ड्रेस हम भी, विद्यालय…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *