कविताएँ पढ़ पाऊँ ByAdmin November 4, 2020December 30, 2020 पढ़ पाऊँ हमेशा से ही मेरी हरसत रही है ये कि मैं भी कभी देखूँ किसी को सामने बैठा कर उसकी झील सी आँखों में अपने को डुबो कर….! एक ख्वाहिश ही रही कि उसकी आँखों को पढ़ पाऊँ क्या लिखा है उसके दिल में क्या चाहत है उसकी क्या दर्द है उसकी आँखों…