Tag: रोमांटिक ग़ज़ल
खिलता हुआ गुलाब या कोई शराब हो
खिलता हुआ गुलाब या कोई शराब हो खिलता हुआ गुलाब या कोई शराब हो। कितना हसीन तुमको कहूं बेहिसाब हो।। मचले है जिसको देख के मस्ती भरा ये दिल। चढती हुई उमर का वो चढता शबाब हो।। देखे हसीन चहरे बहुत से खुदा कसम। तेरा नहीं जवाब कोई लाजवाब हो।। ख्वाबों…
कोई ऐसा मुझे चेहरा नहीं मिलता
कोई ऐसा मुझे चेहरा नहीं मिलता कोई ऐसा मुझे चेहरा नहीं मिलता! निभाएं साथ जो ऐसा नहीं मिलता दुखाने दिल आते है लोग मेरा तो वफ़ा से ही भरा रिश्ता नहीं मिलता खोया हूँ नफ़रतों की भीड़ में मैं तो मुहब्बत का मगर रस्ता नहीं मिलता यहां खोये है अपनें…
समय आए तभी होते जहां में काम सारे ही
समय आए तभी होते जहां में काम सारे ही समय आए तभी होते जहां में काम सारे ही। नहीं आया समय तो फिर हुए नाकाम सारे ही।। सफाई क्या भला देते बुरे जिनकी नज़र में हम। सहे हँस-हँस सदा हमने यहाँ इल्जाम सारे ही।। हुए मशहूर दुनिया में दिलों को बांटने वाले।…
देखकर चलना तू अजनबी राहें है
देखकर चलना तू अजनबी राहें है देखकर चलना तू अजनबी राहें है! हर क़दम पे भरी दुश्मनी राहें है नफ़रतों की राहों पे खोया हूँ मैं तो खो गयी है मुझसे आशिक़ी राहें है राहें आती नहीं है कोई प्यार की आ रही है यहां बेरुख़ी राहें है हम सफ़र…
रोज़ चलके देखा उल्फ़त दोस्ती की राह पे
रोज़ चलके देखा उल्फ़त दोस्ती की राह पे रोज़ चलके देखा उल्फ़त दोस्ती की राह पे चोट खाली है वफ़ाओ आशिक़ी की राह पे उसका चेहरा दर्द ग़म दिल से भुलाने के लिये आ गया हूँ मैं भटकते मयकशी की राह पे ढूढ़ते ही ढूढ़ते राहें मुहब्बत इश्क़ की चलते चलते…
शहर आया तेरी दोस्ती के लिये
शहर आया तेरी दोस्ती के लिये शहर आया तेरी दोस्ती के लिये ! बात कर ले मुझसे दो घड़ी के लिये जीस्त तन्हा गुजरती मेरी जा रही भेज कोई ख़ुदा जिंदगी के लिये आता चेहरा नजर वो कहीं भी नहीं धड़के दिल रोज़ मेरा किसी के लिये जान पहचान जिससें…
काश वो जीवन में आए ही न होते
काश वो जीवन में आए ही न होते काश वो जीवन में आए ही न होते। दिल में यूं मेरे समाए ही न होते।। होती मोहब्बत अगर उनको भी हमसे। उसने ख़त मेरे जलाए ही न होते।। साथ देते ग़र वो मेरा हर कहीं हर मोड़ पर तो। बीच रस्ते ये…
अदब से वो यूं पेश आने लगे है
अदब से वो यूं पेश आने लगे है अदब से वो यूं पेश आने लगे है। कपट में सभी कुछ छुपाने लगे है।। गए थे समझ झूठ पलभर में उनका। नहीं जान पाए जताने लगे है।। बहुत बार झेला फ़रेबों को उनके। मुसीबत में फिर आजमाने लगे है।। छुपाने वो…
उल्फ़त का कभी अच्छा अंजाम नहीं होता
उल्फ़त का कभी अच्छा अंजाम नहीं होता उल्फ़त का कभी अच्छा अंजाम नहीं होता इससे बड़ा कोई भी बदनाम नहीं होता मैं बात नही कह पाता दिल की कभी उससे पीने को अगर हाथों में जाम नहीं होता हर व़क्त घेरे है यादें दिल को बहुत मेरे हाँ यादों से ही…
फूल उल्फ़त का दिया है आज फ़िर
फूल उल्फ़त का दिया है आज फ़िर फूल उल्फ़त का दिया है आज फ़िर! कोई अपना कर गया है आज फ़िर छेड़कर नग्मात दिल के प्यार में कोई दिल रुला गया है आज फ़िर छोड़ जो मुझको गया था भीड़ में वो मुझे अब ढूंढ़ता है आज फ़िर याद आयी…