संजय जैन की कविताएं | Sanjay Jain Poetry
जिंदगी की जंग जीवन के दो राह परजिंदगी आकर ठहर गई है।मौत की देहलीज परजिंदगी आकर रुक गई है।। अनुकूल स्थितियाँ न होने परजिंदगी डग मगा गई है।बनी बनाई व्यवस्थाएँजीवन की बिगड़ गई है।। मौज मस्ती से जिये हैजिंदगी में आनंद लिये है।इसलिए पीड़ा को अबसही नही पा रहे है।। जिंदगी की हर जरूरत कोमिलकर…

