हरियाणवी को भाषा का दर्जा दिलाने के लिए अलख जगा रहे हैं , साहित्यकार डॉ.चंद्रदत्त शर्मा
हर किसी को अपनी मातृभाषा या बोली प्यारी होती है। बच्चा अपना पहला शब्द अपनी मां बोली में ही बोलता है। यही कारण है कि आदमी कहीं भी जाए वह अपनी बोली को नहीं भूलता। हरियाणवी तो ऐसी बोली है कि फिल्म से लेकर विदेश तक धूम मचाए हुए है। उसकी सबसे बड़ी विशेषता यह…

