अहसास कवि का | Ahsaas Kavi ka
अहसास कवि का ( Ahsaas kavi ka ) जब खिले फूल खुशबू को महकाते है हाल भंवरो का जो मंडराते है हर चमन मे उढे जब ये सैलाब सा अपने भावों को हम भी लिख जाते है वार अक्सर जो दिल पर कर जाते है भान उनको भी कुछ हम करवाते है जो करती…
अहसास कवि का ( Ahsaas kavi ka ) जब खिले फूल खुशबू को महकाते है हाल भंवरो का जो मंडराते है हर चमन मे उढे जब ये सैलाब सा अपने भावों को हम भी लिख जाते है वार अक्सर जो दिल पर कर जाते है भान उनको भी कुछ हम करवाते है जो करती…