Bhedbhav kavita

  • Hindi Poetry On Life | भेदभाव

    भेदभाव ( Bhedbhav )     फर्क नही बेटे बेटी में, दोनों  ही आँखों के तारे है। इक धरती सी धीर धरा तो, दूजा गगन के तारे है।   भेद भाव हमसे ना होता, संविधान सिखलाता है। बेटी ही  बस करता रहता, बेटों को झुठलाता है।   दोनों में अन्तर.क्या बोलों,इक शक्ति तो इक शिव…