गांव री गुवाड़ आओ | राजस्थानी कविता
गांव री गुवाड़ आओ ( राजस्थानी कविता ) गांव री गुवाड़ आओ, खेत हरसावै है। ठंडी ठंडी पून बहारां, गांव बुलावै है। काकड़ी मतीरा खाल्यो, चालो म्हारा खेत म। मीठी मीठी बातां करस्यां, ठंडी बालू रेत म। चौपालां अर पगडंडी, गीत सुरीला गावै है। गांव री महक माटी री, थानै गांव बुलावै है। हरया…

