Hindi poem on vrat

  • सौभाग्य का व्रत | Kavita

    सौभाग्य का व्रत ( Saubhagya ka vrat )   धन्य है हमारी आदिशक्ति भारत की नारी तन मन प्राण से व्रत का पालन करती सारी   कभी नही कहती वो अपने मन की अभिलाषा सुख,वैभव,यश,शांति,आरोग्य की करती आशा   हे अर्धांगिनी अमरत्व मिले जगती तल में तुमको साक्षात श्री सौभाग्यशाली हो बनाती तुम सबको  …