जीवन संसय | Jeevan sansay
जीवन संसय ( Jeevan sansay ) जन्म की पीड़ मिटी ना प्यास बुझी, इस नश्वर तन से। अभी भी लिपटा है मन मेरा, मोह में मोक्ष को तज के। बार बार जन्मा धरती पर, तृष्णा में लिपटी है काया। उतना ही उलझा हैं उसमें, जितना ही चाहे हैं माया। भय बाधा को…

