Hindi Poetry On Life | Kavita -काहे कइलू माई एतनी बज्जर क छतिया
काहे कइलू माई एतनी बज्जर क छतिया ( Kahe Kailoo Mai Etni Bajjar Ka Chatiya ) काहे कइलू माई एतनी बज्जर क छतिया। पेटवा में मारऽजिन गिरइ द धरतिया।। कबहुं नाहीं धरती बोवल बीजवा के मारे। बाहर अंकुरवा करे पेंड़ बने सारे ।। जननी जीवदान तोहसे मांगे तो हरी बिटिया ।।पेटवा।। कामकाज…

