अंतिम यात्रा | Kavita antim yatra
अंतिम यात्रा ( Antim yatra ) जीवन की प्रचंड धूप में मनुज तपता रहा दिन रात नयन कितने स्वप्न देखे कितनी शामें कितने प्रभात भाग दौड़ भरी जिंदगी में बढ़ता रहा वो निष्काम चलता रहा मुसाफिर सा अटल पथिक अविराम जीवन सफर में उतार-चढ़ाव सुख-दुख के मेले हंसते-हंसते जीवन बिता आज…

