कविता गूंजे कविता महके | Kavita Goonje
कविता गूंजे कविता महके ( Kavita goonje kavita mahake ) दबा रहे हैं लेखनी वो, बिछा रहे सतरंगी जाल। राजनीति के दांव पेच, दिखा रहे अपना कमाल। शब्द मोती माला बुन, खड़ा हो गया कलमकार। शारदे साधना निरंतर, काव्य की बरसे रसधार। कविता गूंजे कविता महके, शब्द शिल्पी यश पाये। भावों का सागर उमड़े,…

