Kavita Maayka

  • मायका | Kavita Maayka

    मायका ( Maayka ) मायके का तो रगँ ही अलग है हर दिन एक मेला सा लगता है रिश्ते-नाते दोस्त पडोसी हर कोई मिलने आता है पल भर मे मिट जाती है थकान सफर की जब भाभी हाथो की चाय पिलाती है दो घूट भरते ही माँ की याद दिला जाती है खिल जाते है…