सूख गया आंख का पानी | Kavita Sookh Gaya Aankh ka Pani
सूख गया आंख का पानी ( Sookh gaya aankh ka pani ) सूख गया आंख का पानी दिल धड़कना बंद हुआ। आना-जाना रिश्तो में भी अब धीरे-धीरे बंद हुआ। कलह खड़ी है घर के द्वारे स्वार्थ छाया चारों ओर। सिमट गया आज आदमी नींद से जागे देखें भोर। अंधकार ने घेर लिया है मन…

