Poem jal sanrakshan

  • जल संरक्षण | Poem jal sanrakshan

    जल संरक्षण ( Jal sanrakshan )   सोचल्यो समझल्यो थोड़ा हिवड़ा म ध्यारल्यो पाणी घणों मान राखै मन म बिचारल्यो   मोतिड़ा सा दमकै ज्याणी पाणी री आब ज्यूं सांसा री डोर संभळै पाणीड़ा री धार सूं   सूखरया तळाब कुआं लूंवा चालै बारनै पाणीड़ो बचाणो भाया जमाना र कारणै   ठण्डों ठण्डो पाणी मिलज्या…