सिंदूरी सूरज | Poem Sindoori Suraj
सिंदूरी सूरज ( Sindoori suraj ) सिंदूरी सूरज विशाल तेजी से अस्त हुआ धीरे-धीरे सांझ को बुलावा दे चला सरसराती पवन ने बालियों को यू छुआ पंछियों के कलरव ने अंबर से धरती तक चारों दिशाओं को गुंजायमान किया घरौंदो को लौट चलो कि अब अंधेरा हुआ गायों के गले की बजती हुई घंटियां…

