संदीप कुमार की कविताएं | Sandeep Kumar Hindi Poetry
अधूरी चाहत, अमर प्रेम तेरे लिए दिल हमारा,कल की तरह ही धड़कता है।साँसें सँवरकर, रुक-रुक कर,तेरी ही बातों पर मरता है। रूप तेरा चाँद-सा,चाहत में हर पल निखरता है।पतझड़, बसंत, बहार-सा,गुलशन में याद तिरी महकता है। धूप में तन्हा, उदास,जल-जलकर मन रह जाता है।तू बदल जा, जा बेख़ौफ़,लेकिन दिल तुझ पर तरसता है। यह दिल…

