सौंदर्य | Saundarya Kavita
सौंदर्य ( Saundarya ) सौन्दर्य समाहित ना होता, तेरा मेरे अब छंदों में। छलके गागर के जल जैसा, ये रूप तेरा छंदों से। कितना भी बांध लूं गजलों मे,कुछ अंश छूट जाता है, मैं लिखू कहानी यौवन पे, तू पूर्ण नही छंदों में। रस रंग मालती पुष्प लता,जिसका सुगंध मनमोहिनी सा। कचनार कली…

