Shakuntala par kvita

  • शकुंतला | Poem on shakuntala

    शकुंतला ( Shakuntala )     गुमनाम हुआ इस तन से मन, बस ढूंढ रहा तुमको प्रियतम। चक्षु राह निहारे आ जाओ, निर्मोही बन गए क्यों प्रियतम।   क्या प्रीत छलावा था तेरा, या मुझमें ही कुछ दोष रहा। क्यों शकुंतला को त्याग दिया, यह यौवन काल हुआ प्रियतम।   क्यों भूल गए हे नाथ…