सफाई

सफाई

 

आज तक ये बात मेरी समझ में न आई।
तुम करो गन्दगी और मैं करूं सफाई।।

मानवता खातिर काल ब्याल है यह,
तृणवत न लेना बहुत विकराल है यह,
अगर नहीं सम्भले पछताओगे भाई।।तुम करो०

गांव गली कस्बा संसद तक फैली,
स्वच्छ रखो चादर न होजाये मैली,
तन और मन की अब रखो सफाई।।तुम करो०

लूट हत्या बलात्कार घुसखोरी भारी,
बढ़ी बेकारी पर ढीठ महामारी,
पान पुड़िया गुटखा अब बस करो भाई।।तुम करो०

दो बच्चे अच्छे अपनाओ नर नारी,
सबसे बड़ा देवता सफाई कर्मचारी,
स्वच्छ भारत नारा शेष मन में बसाई।‌तुम करो०

 

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कवि व शायर: शेष मणि शर्मा “इलाहाबादी”
प्रा०वि०-बहेरा वि खं-महोली,
जनपद सीतापुर ( उत्तर प्रदेश।)

 

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