दुध नी प्यांदे

पहाड़ी रचना | सुदेश दीक्षित

माह्णुआं दी पछैण

जे करनी माह्णुआं दी पछैण
तां न्यारिया वत्ता हंडणा सिख।
जे पाणा तें आदर मान सारे यां ते।
ता लोकां दा सुख दुःख वंडणा सिख।
खरे खोटे मितरे बैरिये दा पता नि चलदा।
सुप्पे साही फटाकेयां देई छंडणा सिख।

ईह्यां नि जवानी ते जैह्र बुऴकणा।
मोका दिक्खी सर्पे साहि डंगणा सिख।

रूड़दे माह्णुए जो नि कोई बचांदा।
डूब्बी तैरी करी अप्पु ही बचणा सिख।

दुध नी प्यांदे

कुसी दे ग्लाए दा असां बुरा नी मनांदे।
सच है एह जे सर्पां जो दुध नी प्यांदे।

पता नी लोक घटोई घटोई ने कजो जींदे।
दिले दे दुःख दर्द कैंहं नि कुसी ने नी ग्लांदे।

गऴे दा ग्ऴफाह् बणदा इक तरफा इश्क।
कर ने ते पहलें दिले कैसे नी समझांदे।

मसीबता च गरीब पडेसी कम्मे ओंदा।
समझाए कुण जे गरीबां जो नी डरांदे।

ज़बान गुडे ने मिठ्ठी नि, हुंदी, मिठ्ठे बोलां ने।
मन्ने जेह्डा हर गल्ल तिस पर मैई नी चलांदे।

घरे च बरकत, रोनक रैह्ंदी वजुर्गां कन्ने ।
तां मितरो वजुर्गां जो घरे ते नी नठांदे।

सुदेश दीक्षित

बैजनाथ कांगड़ा

यह भी पढ़ें:-

Similar Posts

  • श्री चरण | Shree Charan

    ” श्री चरण “ ( Shree charan )    श्री गिरिधर दीजिए , मुझे श्री चरणों में निवास । बड़ा कठिन रहा विरह तुमसे , मिलन की गिरधर तूझसे आस ।। चरण पखारे जिनके यमुना नित, जिन पर श्री राधा रानी प्रेम लुटाएँ । मीरा भक्ति करें मग्न हो जिनकी , सुदामा सा मित्र जिन्हें…

  • कल गणतंत्र दिवस की भोर हैं

    कल गणतंत्र दिवस की भोर हैं कल गणतंत्र दिवस की भोर है,मेरा मन आत्म विभोर है।चारों ओर तिरंगे का शोर है,रंगोली लाइट द्वार सजे चारों ओर हैं।कल गणतंत्र दिवस की भोर हैं,मेरा मन आत्म विभोर है।। लहरा रहा तिरंगा देखो कैसी शान से,गूंजेगा कल देश गौरव गान से।सजा देश केसरिया श्वेत हरे रंग से,चारों ओर…

  • वृक्ष हमारे तुम संरक्षक हो

    वृक्ष हमारे तुम संरक्षक हो वृक्ष हमारे तुम संरक्षक होहरे भरे हो खड़े हो सीना ताने।भव्य शस्यश्यामल है रूप तिसारा,लगते कोई हमारे शुभ चिंतक हो।घने घने हरे भरे पत्तों से सुशोभित,थलचर -नभचर को आश्रय देते-हो।शीतल छांव तुम्हारी देती आश्रय,हर प्राणी हर चर अचर को।सकल ब्रम्हांड में हो जय जयकार तुम्हारी,वृक्ष तुम मित्र हो, है तुम्हारी…

  • साफ सुथरा शहर को बनाया करो | Safai par Kavita

    साफ सुथरा शहर को बनाया करो ( Saaf suthra shahar ko banaya karo )   साफ सुथरा शहर को, बनाया करो। आज प्रॉमिस डे में हमसे, वादा करो।। छोड़िए न सड़क पर, आवारा इन्हें अपने पशुओं को घर में ही पाला करो।। पूजते हो जिसे मां के जैसा ही तुम , गंदगी कर नदी को…

  • औरत | Poem in Hindi on Aurat

    औरत! ( Aurat )    घर को घर देखो बनाती है औरत, रंग – बिरंगे फूल खिलाती है औरत। न जाने कितने खेले गोंद में देवता, उम्रभर औरों के लिए जीती है औरत। लाज- हया धोकर कुछ बैठे हैं देखो, कभी-कभी कीमत चुकाती है औरत। जिद पर आए तो जीत लेती है मैदान, झाँसी की…

  • जन्म दिन | Janam din par kavita

    जन्म दिन ( Janam din )   आज जन्मदिन के अवसर पर हम दे क्या उपहार, सबसे बढ़कर आपको करते हैं हम प्यार।   मृदुल कोमल सरल है उत्तम नेक विचार, आप सुगंधित पुष्प सा फैलें जग संसार।   हृदय से है आपका वंदन बारंबार, क्या दे दे हम आपको दूजा और उपहार।   स्नेह…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *