Poem in Hindi on Aurat

औरत | Poem in Hindi on Aurat

औरत!

( Aurat ) 

 

घर को घर देखो बनाती है औरत,
रंग – बिरंगे फूल खिलाती है औरत।
न जाने कितने खेले गोंद में देवता,
उम्रभर औरों के लिए जीती है औरत।

लाज- हया धोकर कुछ बैठे हैं देखो,
कभी-कभी कीमत चुकाती है औरत।
जिद पर आए तो जीत लेती है मैदान,
झाँसी की रानी बन जाती है औरत।

नारी को कमजोर तुम कभी न समझो,
मंगल- चाँद तक वो जाती है औरत।
पाकर के मौत फिर से देती है जिन्दगी,
कितनी शक्तिशाली होती है औरत।

चुपचाप कितनी सहती है वो जिल्लत,
जमाने का गम पी जाती है औरत।
वो ताकत है देश की,ताकत है विश्व की,
पीठ पर वो रोटी पकाती है औरत।

औरत न होती तो समझो दुनिया न होती,
मन को सुकूँ भी तो देती है औरत।
बुझा दो रिवाजों की जलती उस अग्नि को,
एक देह भर ही नहीं होती है औरत।

 

रामकेश एम.यादव (रायल्टी प्राप्त कवि व लेखक), मुंबई

यह भी पढ़ें :-

कौन बुझाये | Kavita Kaun Bujhaye

 

Similar Posts

  • मेरा प्यारा भारत देश | Bharat Desh par Kavita

    मेरा प्यारा भारत देश ( Mera pyara bharat desh )    मेरा प्यारा भारत देश सभी देशों मे यह नम्बर एक, मिलकर रहतें हमसब एक इसमें नहीं है कोई भेद। भाषाऍं यहां बहुत अनेंक पर रंग रूप सबका एक, पहनावा भी सबका भिन्न पैदा होता यहां पर अन्न।। हिन्दू, मुस्लिम सिख, ईसाई रहते सभी भाई-भाई,…

  • तबस्सुम | Poem on Tabassum

    तबस्सुम ( Tabassum )    तरोताजगी भर जाती तबस्सुम महफिल को महकाती तबस्सुम दिलों के दरमियां प्यारा तोहफा चेहरों पे खुशियां लाती तबस्सुम गैरों को अपना बनाती तबस्सुम रिश्तो में मधुरता लाती तबस्सुम खिल जाता दिलों का चमन सारा भावों की सरिता बहाती तबस्सुम घर को स्वर्ग सा सुंदर बनाती तबस्सुम सुंदरता में चार चांद…

  • प्रकृति | Prakriti par Kavita

    प्रकृति ( Prakriti )   इस प्रकृति की छटा है न्यारी, कहीं बंजर भू कहीं खिलती क्यारी, कल कल बहती नदियां देखो, कहीं आग उगलती अति कारी।   रूप अनोखा इस धरणी का, नीली चादर ओढ़े अम्बर, खलिहानों में लहलाती फसलें, पर्वत का ताज़ पहना हो सर पर।   झरनों के रूप में छलकता यौवन,…

  • पंडित श्रद्धाराम फिल्लौरी | Shardha Ram Phillauri

    पंडित श्रद्धाराम फिल्लौरी ( Shardha Ram Phillauri ) हे! संत साहित्य सरोवर के, मैं तुझ पे अभिमान करूँअर्पण करके क़लम मैं तुझको, हृदय से सम्मान करूँ॥ सहज सरल व्यक्तित्व तुम्हारा, साहित्य अद्भुत रचा न्याराबहायी प्रेम की रस-धारा, शत-शत मैं प्रणाम करूँ॥ विश्व-विख़्यात लिखी आरती, सभी के हृदय को जो ठारतीनत-मस्तक हैं सभी भारती, मैं भी…

  • अभिलाषा | Abhilasha kavita

    “अभिलाषा” ( Abhilasha )   चाह बहुत  मनमंदिर मे भारत वीरो का गान करूं  उनकी त्याग तपस्या का सदा मान सम्मान करूं    श्रद्धा सुमन से ईश्वर की निसादिन करूं मैं पूजा  भक्ति भाव में जो सुख पाऊं और कहां है दूजा   दिल मे ईच्छा गुरु चरणों में बना रहे मेरा ध्यान शून्य ह्रदय…

  • एक पुरुष की पीड़ा | Purush ki Peeda

    ” एक पुरुष की पीड़ा “ ( Ek purush ki peeda )   कहने को तो मर्द ताकतवर होता है, पर उससे बड़ा कमजोर कोई नहीं होता, कानून भी बने हैं नारी की सुरक्षा के लिए मर्दों की कोई सुनने वाला कहाँ होता है। जीवन भर परिवार के लिए कमाता है, जोड़कर जमा पूंजी आशियाना…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *