माँ का आँचल

“माँ का आँचल – प्रेम की छाँव, बलिदान का गीत”

माँ केवल जन्म देने वाली नहीं, बल्कि जीवन की पहली गुरु, मार्गदर्शिका और सबसे करीबी मित्र है। उसकी ममता जीवनभर हमें सुरक्षा, सुकून और संस्कार देती है। माँ का आशीर्वाद किसी कवच से कम नहीं, जो हर मुश्किल में हमें संबल देता है। मदर्स डे पर उसे सम्मान देना मात्र एक औपचारिकता नहीं, बल्कि उसके अनमोल त्याग और प्रेम की स्वीकारोक्ति है। माँ का प्रेम अनमोल है, जो हमें जीवन की हर कठिनाई में हिम्मत और सहारा देता है।

माँ – यह छोटा सा शब्द अपने भीतर असीम गहराई और अपरिमित प्रेम समेटे हुए है। इसे शब्दों में समेट पाना शायद किसी के लिए भी संभव नहीं है। यह पहला सम्बोधन है जो हर बच्चा जन्म के बाद सबसे पहले बोलता है। माँ केवल जन्म देने वाली नहीं, बल्कि जीवन का पहला स्पर्श, पहली मुस्कान और पहली सीख होती है। नौ महीने तक अपनी कोख में पालने से लेकर जीवनभर की चिंता और देखभाल तक, माँ का प्रेम हर रूप में अमूल्य और निश्छल है।

माँ का प्यार अंधा होता है, इसे केवल महसूस किया जा सकता है। वह अपने बच्चों के लिए रात-रात भर जागती है, उनके हर दर्द को अपने दिल से महसूस करती है। हमारे भारतीय समाज में माँ को देवी का दर्जा दिया गया है, और शायद इसीलिए उसे ‘धरती पर भगवान’ कहा जाता है। फिर भी, इस असीम प्रेम और त्याग का मोल चुकाना शायद किसी के बस की बात नहीं।

माँ ममता की खान है, धरती पर भगवान,
माँ की महिमा मानिए, सबसे श्रेष्ठ-महान।
माँ कविता के बोल-सी, कहानी की जुबान,
दोहे के रस में घुली, लगे छंद की जान।

माँ का स्नेह, त्याग और सहनशीलता की कोई सीमा नहीं होती। वह हर मुश्किल घड़ी में ढाल बनकर खड़ी रहती है। कहते हैं, किसी भी चोट का पहला असर माँ पर होता है, फिर बच्चे पर। उसकी ममता किसी भी आंच को सहन करने का साहस रखती है। माँ का आँचल बच्चे के लिए सबसे सुरक्षित स्थान होता है, चाहे वह बच्चा कितना भी बड़ा क्यों न हो जाए।

मदर्स डे – यह दिन दुनिया भर में माँ के योगदान और प्रेम को सम्मानित करने के लिए मनाया जाता है। इसकी शुरुआत अमेरिका की ऐना जार्विस ने की थी, जिन्होंने 1908 में अपनी माँ की याद में यह परंपरा शुरू की। आज यह दिन माताओं के प्रति आभार प्रकट करने का एक सुअवसर बन चुका है। दुनिया के अधिकांश देशों में यह मई के दूसरे रविवार को मनाया जाता है।

लेकिन क्या केवल एक दिन का सम्मान माँ के अनमोल योगदान के लिए पर्याप्त है? शायद नहीं। असल में, माँ का प्रेम तो उस निस्वार्थ भावना का प्रतीक है जो हर दिन, हर क्षण हमें संजीवनी की तरह जीवन देती है। माँ का यह समर्पण कभी छुट्टी नहीं लेता, न ही थकता है।

माँ वीणा की तार है, माँ है फूल बहार,
माँ ही लय, माँ ताल है, जीवन की झंकार।
माँ हरियाली दूब है, शीतल गंग अनूप,
मुझमें तुझमें बस रहा, माँ का ही तो रूप।

बुढ़ापा, जब माँ को सबसे ज्यादा प्यार और सम्मान की जरूरत होती है, वही वह समय है जब अक्सर हम अपनी जिम्मेदारियों में उलझ कर उसे अकेला छोड़ देते हैं। आज की व्यस्त जीवनशैली में बुजुर्ग माताएं उपेक्षित और असहाय महसूस करने लगती हैं। यह स्थिति समाज की उस संवेदनहीनता को दर्शाती है, जो अपनी ही जननी का मान रखना भूल चुकी है।

मां केवल जन्मदात्री ही नहीं, जीवन की मार्गदर्शिका और प्रेम की अनमोल मूर्ति है। मां धरती पर विधाता की प्रतिनिधि है, जो अपने बच्चों को जीवन की हर चुनौती से जूझने की शिक्षा देती है। मां ही वह पहली गुरु है, जिसने हमें चलना, बोलना और जीवन जीना सिखाया।

स्टीव वंडर ने सही कहा है – “मेरी माँ मेरी सबसे बड़ी अध्यापक थी, करुणा, प्रेम और निर्भयता की एक शिक्षिका।” सचमुच, अगर प्यार एक फूल के समान मधुर है, तो माँ उस फूल की सबसे मीठी सुगंध है।

अब हमारी बारी है कि हम अपनी माँ को सम्मान और प्यार दें, जिससे वह अपनी बची हुई जिंदगी खुशी और सुकून से जी सके। माँ का आशीर्वाद सदा कवच बनकर हमें हर कष्ट से बचाता रहेगा।

तेरे आँचल में छुपा, कैसा ये अहसास,
सोता हूँ माँ चैन से, जब होती हो पास।
माँ तेरे इस प्यार को, दूँ क्या कैसा नाम,
पाये तेरी गोद में, मैंने चारों धाम।

माँ केवल जन्म देने वाली नहीं, बल्कि एक सम्पूर्ण जीवन दर्शन है। उसकी ममता में प्रेम, करुणा और त्याग की वह मिठास है जो इस दुनिया की हर कड़वाहट को मीठा कर देती है। हर बच्चे के लिए उसकी माँ ही उसकी दुनिया होती है, और शायद यही वजह है कि माँ की गोद में सोने का सुख किसी भी स्वर्गिक सुख से अधिक माना जाता है।

माँ की छाँव में बचपन से लेकर जवानी तक का सफर बेहद खुशनुमा होता है। उसका आशीर्वाद जीवन की हर ठोकर को सहलाने का काम करता है। माँ का हाथ थामकर चलना सिखने वाला बच्चा जब बड़े होकर अपने रास्ते चलने लगता है, तब भी उसकी माँ उसकी हर खुशी और हर दर्द में उसके साथ रहती है।

माँ केवल जन्म देने वाली नहीं, बल्कि जीवन का आधार, प्रेरणा और सच्ची मार्गदर्शक है। वह प्रेम, त्याग, और करुणा की साक्षात प्रतिमूर्ति है, जिसके बिना जीवन अधूरा है। माँ का हर स्पर्श, हर आशीर्वाद संतान के जीवन को संजीवनी की तरह सींचता है। जैसे धरती अपनी संतान को उगाती है, वैसे ही माँ अपने बच्चों को हर परिस्थिति में मजबूती से खड़ा करना सिखाती है।

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में, जहां हम छोटी-छोटी बातों में उलझकर अपने रिश्तों को भूलने लगे हैं, वहां माँ का निस्वार्थ प्रेम हमें मानवीयता की असली पहचान दिलाता है। यह आवश्यक है कि हम केवल एक दिन नहीं, बल्कि हर दिन माँ के इस अविरल प्रेम का सम्मान करें और उसे वो खुशियाँ दें, जिनकी वह सच्ची हकदार है। माँ के आँचल में जो सुकून है, वह किसी और जगह नहीं मिल सकता। माँ की ममता, आशीर्वाद और शिक्षाएँ जीवन की सबसे बड़ी संपत्ति हैं, जिन्हें कभी भुलाया नहीं जा सकता।

तेरे आँचल में छुपा, कैसा ये अहसास,
सोता हूँ माँ चैन से, जब होती हो पास।

प्रियंका सौरभ

रिसर्च स्कॉलर इन पोलिटिकल साइंस,
कवयित्री, स्वतंत्र पत्रकार एवं स्तंभकार,
उब्बा भवन, आर्यनगर, हिसार (हरियाणा)-127045

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