मेरी कहानी में तुम
मेरी कहानी में तुम
पता नहीं, मेरी कहानी में तुम थे भी या नहीं,
पर हर पन्ने पर तुम्हारी परछाईं दर्ज थी।
कभी कोई बात,
कभी कोई लम्हा,
तो कभी वो खामोशियाँ,
जो अब भी तुम्हारा नाम लेती हैं।
मेरी कहानी में तुमसे बिछड़ने की कसक थी,
अधूरे ख्वाब थे,
अधूरी बातें थीं,
और वो एहसास… जिसे मैं चाहकर भी बयां नहीं कर सकती।
तुम्हारे लौट आने का एक अधूरा वादा था,
और साथ में हर वो धोखा भी,
जो मेरी पीठ पीछे किसी और के हिस्से में था।
तुम्हारी हँसी अब किसी और की पहचान बन गई,
तुम्हारा प्यार किसी और का सुकून बन गया,
और मैं?
मैं बस वहीं ठहरी रही,
जहाँ तुमने मुझे आखिरी बार छोड़ा था।
मेरी कहानी में सिर्फ़ एक मैं थी,
तुम थे… मगर सिर्फ़ धुंधली यादों की तरह,
जो ना पूरी तरह मिटती हैं,
ना ही दोबारा जी जाती हैं।

रश्मि जोशी
( उत्तराखंड )







