आलेख

  • काशी विश्वनाथ मंदिर के रोचक तथ्य

    “ऊं नमः पार्वतीपतयेहर हर महादेव ““शिव सृजन है और विनाश भीशिव मंदिर है और श्मशान भीशिव आदि हैं और अनंत भीमेरे महादेव ही स्वर्ग है, महादेव ही मोक्ष हैं “ काशी विश्वनाथ मंदिर बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है। काशी विश्वनाथ मंदिर का हिंदू धर्म में एक विशिष्ट स्थान है। ऐसा माना जाता है कि…

  • नर नारायण

    ब्रह्मांड के दो प्रमुख अवयव है जो परब्रम्ह परमात्मा कि कल्पना रचना कि वास्तविकता है प्रथम प्रकृति हैजो ब्रह्मांड का आधार है जिसमे पंच तत्व महाभूतों का सत्यार्थ परिलक्षित है जिसका प्रवाह पवन,पावक ,शून्य (आकाश) स्थूल (पृथ्वी) जल प्रावाह का सत्य है इन्ही के आधार पर प्राण का अस्तित्व निर्धारित होता है । प्राण को…

  • कबीर जन्मोत्सव विशेष

    कबीर दास जी का जन्म वर्ग जाती के सूत्रपात या उत्कर्ष काल में नहीं हुआ था!कबीर दास जी सन 1398 में बालक रूप में लहरतारा तालाब पर पाए गए थे तत्कालीन समय तैमूर लंग कि क्रूरता से भारत वर्ष त्रस्त ससंकित भयाक्रांत था और भरतीय समाज अपनी रक्षा कि आस में दर बदर भटक रहा…

  • पर्यावरण संरक्षण

    पर्यावरण ऐसा विषय जिसका संबंध प्रकृति प्राणी प्राण परमेश्वर से है!प्रकृति के प्रमुख दो तत्वों में प्रकृति प्राणी है और प्रकृति प्राणी में जो चैतन्य सत्ता है वहीं परमेश्वर का सत्यार्थ है! स्पष्ट है कि प्रकृति प्राणी इनकी चैतन्य सत्ता परमेश्वर के मध्य सामंजस्य होना ही इनके कल्याण उद्भव उत्कर्ष एवं उत्थान उद्धार के लिए…

  • भारत में शिक्षा

    1- शिक्षा का महत्व शिक्षा और समाज किसी भी राष्ट्र और उसमे निवास करने वाले समाज की भौतिकता और नैतिकता का निर्धारण उस राष्ट्र के शिक्षा स्तर पर ही निर्धारित किया जा सकता है ।। विकास और सामजिक उद्धान दोनों का मूल मानव संसाधन है जब तक संसाधन श्रोत पूर्णतः परिस्कृत परिमार्जित ना हो ना…

  • प्रारब्ध का सत्य

    होनी एव संयोग एक दूसरे के सहोदर है जो प्रारब्ध कि प्रेरणा है लेकिन इन तीनो को कर्म ज्ञान और सत्य से परिवर्तित किया जा सकता है। प्रस्तुत कहानी में सुभद्रा से अजुर्न को किसी संतान का योग नही था मामा भगवान श्री कृष्ण स्वंय इंद्र का स्वरूप 16 वर्षो के लिए मांग कर लाएं…

  • सावन – भक्ति, साधना और आत्मशुद्धि का पावन मास

    सावन का महीना भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा में न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह एक गहन आध्यात्मिक अनुभव का भी प्रतीक है। इस मास में शिव और शक्ति — दोनों की उपासना का विशेष महत्व है। भगवान शिव को जहां सृष्टि का संहारक और संरक्षणकर्ता माना जाता है, वहीं शक्ति, अर्थात…

  • नशा नाश का मार्ग भाग

    सनातन धर्म में मदिरा का सन्दर्भ अनेक सन्दर्भो में आता है सनातन सत्य और प्राणी ब्रह्माण्ड ब्रह्म की सम्पूर्णता की संस्कृति संस्कार का धारण है अतः प्राणी मात्र के कल्याणार्थ उसकी प्रबृति परिस्थिति के अनुसार जीवन मूल्य को चुनने का विकल्प प्राणी मात्र पर छोड़ दिया गया है। सनातन में आराधना की बाम पद्धति और…

  • आत्म जागरण का पर्व: गुरु पूर्णिमा

    सामान्यतया सभी जीवों का जन्म माता-पिता के सहयोग से होता है वह चाहे पशु पक्षी हो या मानव । परंतु मानव जीवन में ही हम गुरु ज्ञान प्राप्त कर सकते हैं। मां पालन पोषण तो कर सकती हैं ,पिता आवश्यकता की पूर्ति कर सकते हैं परंतु जीवन में व्याप्त ज्ञान रूपी अंधकार से निकाल कर…

  • नारी शक्ति के नौ रूपों कि आराधना नौरात एवं वर्तमान में भारत में नारी का यथार्थ –

    किसी भी युग या समाज के अस्तित्व कि कल्पना ही नही की जा सकती है ब्रह्म भी बिना नारी शक्ति के अधूरा है यदि सनातन में ब्रह्मा ,विष्णु ,शंकर देव है तो सरस्वती,लक्ष्मी ,पार्वती त्रिदेवियों नारि शक्ति बिना देव शक्ति संतुलित नही होती चूंकि ब्रह्म सत्ता निरपेक्ष एव विभेद रहित होती है अतः पूर्ण ब्रह्म…