Category: विवेचना
शान्ति,सत्य में निवास करती है, मिसाइलों में नहीं
इंसानियत के पैमाने पर एक लंबे समय तक दुनिया में रहा जा सकता है लेकिन बे-इंतिहाँ दुश्मनी करके धरती और आकाश में टिकना मुश्किल है। रूस और यूक्रेन का युद्ध एक लम्बे अरसे से कुछ इसी तरह से चल रहा है वहीं दूसरी तरफ इजराइल और गाजा का युद्ध हमारी मानवता तथा विश्व बाजार को…
दरख्त के शामियाने में जिन्दगी का सुकूँ ढूँढे
छाँवों से हटकर दरख्त न जाने क्या-क्या चीजें हमें प्रदान करते हैं लेकिन हमने इनकी अहमियत कभी नहीं समझी और जिस काम के लिए कुदरत इन्हें बनाई है हमारे लिए हम ठहरे लालची, उल्टे इन्हें दिन-रात काट रहे हैं, इनके साथ ये कितनी नाइंसाफ़ी है। ये बेचारे, चिलचिलाती धूप,घनघोर कुहरे, लू -लुआर से बचाकर हमें…
बाल भटकावों को कैसे दूर करें
जब बच्चों को भावनाओं या व्यवहार से जुड़ी परेशानी होती है, तो मानसिक स्वास्थ्य देखभाल तक पहुँच महत्वपूर्ण होती है। कुछ परिवारों के लिए अपने बच्चों के लिए मानसिक स्वास्थ्य देखभाल प्राप्त करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। लगभग 5 में से1 बच्चे को मानसिक, भावनात्मक या व्यवहार संबंधी विकार1 होता है, जैसे कि चिंता या…
जिम्मेदारी क्यों नहीं निभा पा रही साहित्य अकादमियां?
पिछले दशकों में पुरस्कारों की बंदर बांट कथित साहित्यकारों, कलाकारों और अपने लोगों को प्रस्तुत करने के लिए विशेष साहित्यकार, पुरोधा कलाकार, साहित्य ऋषि जैसी कई श्रेणियां बनी है। जिसके तहत विभिन्न अकादमियां एक दूसरे के अध्यक्षों को पुरस्कृत कर रही है और निर्णायकों को भी सम्मान दिलवा रही है। इन पुरस्कारों में पारदर्शिता का…
पुरस्कारों की बंदर बांट | Puraskaron ka Bandar Baant
आखिर क्यों सही से काम नहीं कर पा रही साहित्य अकादमियां? पिछले दशकों में पुरस्कारों की बंदर बांट कथित साहित्यकारों, कलाकारों और अपने लोगों को प्रस्तुत करने के लिए विशेष साहित्यकार, पुरोधा कलाकार, साहित्य ऋषि जैसी कई श्रेणियां बनी है। जिसके तहत विभिन्न अकादमियां एक दूसरे के अध्यक्षों को पुरस्कृत कर रही है और निर्णायकों…
पेड़ों को मोहब्बत भरी नजर से देखो तो धूप भी चाँदनी लगेगी
जिन वृक्षों की छाया में बैठकर लोग विश्राम करते थे,राही सुस्ताते थे,हम तरह-तरह के खेल खेलते थे और परिन्दे अपने घोंसले बनाते थे, फल-फूलों से लदे-सजे वे वृक्ष अब धरती पर कम ही बचे। हमारी लालच ने उन्हें काट डाला। महकते आमों के वृक्ष कहीं दूर-दूर तक नजर नहीं आते। आम की बात छोड़िये बड़े…
आत्महत्या ईश्वर के प्रति अपराध
प्रेम में असफल होने पर, परीक्षा में फेल होने पर आज का युवा आत्महत्या करने पर उतारू हो जा रहा है। यह कुंठा और हताशा जीवन मूल्यों में आईं गिरावट और आस्था के संकट का परिणाम है। ईश्वर की दी हुई काय को समाप्त करने का अधिकार भी उसे ही है। ऐसे में आत्महत्या मानवता…
नशा मुक्त समाज बनेगा ध्यान से
सोचे! मनुष्य नशा क्यों करता है? जब उसके जीवन में राग प्रबल होता है वह तनाव से भर जाता है। तनाव से, चिंता से मुक्ति का उपाय वह नशे में खोजता है। नशे के धुए में वह स्वयं को भुला देते हैं । ऐसे लोग जो ज्यादा तनाव चिंता में होते हैं नशा ज्यादा करते…
योग से आएगी- विश्व शांति
आज परिवार समाज के साथ ही संपूर्ण राष्ट्र विभिन्न प्रकार के लड़ाई झगड़ों में व्यस्त है। इस हिंसा के जड़ को आखिर कैसे खत्म किया जा सके? ऐसी स्थिति में है योग एक अमूल्य हथियार के रूप में संपूर्ण मानवता के लिए वरदान सिद्ध हो रहा है। देखा गया है कि जो व्यक्ति आंतरिक रूप…
धूप का बोझ नहीं सह पा रही है धरती – रामकेश
सवांद सूत्र, मुंबई के जाने-माने लेखक और रॉयल्टी प्राप्त कवि रामकेश एम. यादव पड़ रही इस भीषण गर्मी पर अपने मनोभाव कुछ इस तरह व्यक्त किए हैं। उनका मानना है कि आसमां से बरसती आग लोगों के जीवन की ख्वाहिश दिनोंदिन छीनती जा रही है। एसी, कूलर बे-जान होते जा रहे हैं। आये दिन बे…