Category: शेरो-शायरी
अपने वादे से ही बदल रहा है वो | Wade shayari
सभी अपने वादे से ही बदल रहा है वो ( Sabhi apne wade se hi badal raha hai wo ) सभी अपनें वादे से ही बदल रहा है वो मुहब्बत का फूल पैरों कुचल रहा है वो कभी नहीं मेहनत से तो कमाया पैसा है हराम की दौलत पैकर उछल रहा है…
हुस्न भरी वो गुल आंखें है | Aankhen Shayari
हुस्न भरी वो गुल आंखें है ( Husn bhari wo gul aankhen hai ) हुस्न भरी वो गुल आंखें है ? उल्फ़त से महकी सांसें है जो क़िस्मत में न लिखा मेरी उसके ही आते सपनें है रब देख मिला दे उससे अब आती रोज़ बहुत यादें है दीदार करुं…
उसकी ही देखी राहें है | Teri yad shayari
उसकी ही देखी राहें है ( Uski hi dekhi rahen hai ) उसकी ही देखी राहें है काटी यादों में रातें है यूं भूल नहीं पाया उसको याद बहुत आती बातें है ख़ंजर मारा ऐसा दग़ा का निकली दिल से आहें है देख उतारुं क्या वो सदका मख़मूर दग़ा जो…
अब गुलों की बहार हो जाये | Bahar shayari
अब गुलों की बहार हो जाये ( Ab gulon ki bahar ho jaye ) अब गुलों की बहार हो जाये? टूटे दिल को क़रार हो जाये तू मिला है मुझे बहुत दिन में जाम इक आज यार हो जाये मुंह चढ़ाना बहुत हुआ देखो प्यार अब तो इक़रार हो जाये …
तू प्यार की हमेशा दिल में चाह कर | Pyar wali ghazal
तू प्यार की हमेशा दिल में चाह कर ? ( Tu pyar ki hamesha dil mein chah kar ) तू प्यार की हमेशा दिल में चाह कर ? नफ़रत की यूं न दिल में तू पनाह कर तू डोर तोड़ मत रिश्तें वफ़ा भरी तू रिश्तें में वफ़ा से ही निबाह कर…
हुस्न के खिलते से चेहरे | Husn shayari
हुस्न के खिलते से चेहरे ( Husn ke khilte se chehre ) हुस्न के खिलते से चेहरे के लिए ! फूल भेजे ख़ूब रिश्तें के लिए प्यार की दे आया हूँ मैं क़िताब वो नर्म उसके आज लहजे के लिए दर्द दिल में ही लिए वो हिज्र का छोड़ दिया घर…
मेरे दरमियाँ | Ghazal mere darmiyan
मेरे दरमियाँ ( Mere darmiyan ) कहाँ वो बैठा मेरे दरमियाँ और उसी से मैं करता बातें बयाँ और नहीं पहली थमी है यादों की टीस लगी है ख़ूब मुझको हिचकियाँ और वफ़ाओ में नहीं कर तू दग़ा यूं सनम मेरे यहाँ देखो मकाँ और मिली राहत ग़मों से क्या…
चल रहीं थीं वहां आतिशबजियाँ | Ghazal aatishbajiyan
चल रहीं थीं वहां आतिशबजियाँ ( Chal rahi thi wahan aatishbajiyan ) चल रहीं थीं वहाँ आतिश बाजियाँ, लोग सब समझे सवेरा हो गया घर से निकले तो हुये हैरान जब, सिर्फ कुछ पल में अन्धेरा हो गया !! गली, कूचे, गाँव, कस्बे और शहर, पूछते थे आँखों आँखों में सवाल जिसके आने…
समझा रहा समझदारी से | Ghazal
समझा रहा समझदारी से ( Samjha rahe samajhdari se ) समझा रहा समझदारी से, साकी यह मयखाने में ! गांधीजी का ध्यान रखो सब,पीने और पिलाने में !!१ सही और असली ‘गांधी’ हो, तब पा सकते हर सुविधा कड़ी सजाऍं होंगी नकली- गांधी के मिल जाने में !!२ सुनकर स्वर विरोध के…
ख़ुदा और मुहब्बत | Ghazal khuda aur muhabbat
ख़ुदा और मुहब्बत ( Khuda aur muhabbat ) आ ज़रा मिलनें मुझे बस एक लम्हे के लिए! आ निभाने आज तू अब हर उस वादे के लिए हां करेगा वो मुराद पूरी दिल की अल्लाह सब तू बना दे रोठी उस दरवेश भूखे के लिए बात हो उससे मुहब्बत की सकूं…