Category: शेरो-शायरी
कौन रक्खे प्यार अपने के लिए | Badiya si ghazal
कौन रक्खे प्यार अपने के लिए ( Kaun rakhe yaar apne ke liye ) कौन रक्खे प्यार अपने के लिए ! लड़ रहे है लोग पैसे के लिए दिल भरा है ख़ूब लालच से यहाँ कौन लड़ता देखो रिश्तें के लिए और तू तैय्यार मिलनें को नहीं शहर से आया हूँ…
रेज़ा रेज़ा | Reza reza
रेज़ा रेज़ा ( Reza reza ) इकट्ठा करती हूँ बीनती हूँ इक इक टुकड़ा बारीक से बारीक किरचन उठाती हूँ देखती हूँ अपनी लाल हुई ज़ख्मी उंगलियां कभी उस टूटे हुये आईने को . . . . आईने को? या रेज़ां रेज़ां खुद को? लेखिका :- Suneet Sood Grover अमृतसर ( पंजाब ) यह भी…
जीस्त में वो फ़िज़ा रब यहां दें मुझे | Nai nai ghazal
जीस्त में वो फ़िज़ा रब यहां दें मुझे ( Jeest mein woh fiza rab yahan de mujhe ) जीस्त में वो फ़िज़ा रब यहां दें मुझे प्यार की उम्रभर वो रवां दें मुझे जीस्त के ख़्वाब वो पूरे कर दें सभी और ए रब नहीं इम्तिहां दें मुझे रख सलामत शाखें प्यार…
वतन | Watan shayari
वतन ( Watan ) इश्क,आशिकी,महोब्बत , जुनूं , तुझसा ही वतन, वतन सा ही है तू…. कहाँ वो अमन, कहाँ मिले सुकूं न सरहदों के इधर , न सरहदों से दूर…. आज़ाद हुये मगर गुलाम अभी तलक बात मज़हबों की , इंसानियत से दूर…. खून तो खौलता है, बहता भी है…
मत दिखा दिल ख़फ़ा रोज यूं और तू | Dil khafa
मत दिखा दिल ख़फ़ा रोज यूं और तू ! ( Mat dikha dil khafa roj yoon aur tu ) मत दिखा दिल ख़फ़ा रोज यूं और तू ! बांध दिल से वफ़ा की मगर डोर तू प्यार से पेश आता नहीं अपनों से आ गया है कैसा देखले दौर तू हर घड़ी…
ऐसा मुझसे वो रूठा है | Rootha shayari
ऐसा मुझसे वो रूठा है ( Aisa mujhse wo rootha hai ) ऐसा मुझसे वो रूठा है टुकड़े टुकड़े वो रिश्ता है नफ़रत की चोट बहुत खायी दिल उल्फ़त का ही प्यासा है वो मिलता न मुझे है सच में आंखों में जिसका सपना है तोड़ी डोर वफ़ा की उसनें…
प्यार मेरा यार कब साकिन हुआ | Pyar mera shayari
प्यार मेरा यार कब साकिन हुआ ( Pyar mera yaar kab sakin hua ) प्यार मेरा यार कब साकिन हुआ अब बड़ा पाना उसे मुमकिन हुआ प्यार मेरा कब उसी ने समझा है वो जिगर से कब सनम कमसिन हुआ मुफ़लिसी का कब भला उसनें किया इस जहां में वो बड़ा…
वो खिला सा शबाब में चेहरा | Ghazal shabab chehra
वो खिला सा शबाब में चेहरा ( Wo khila sa shabab mein chehra ) यार दीदार कैसे होता फ़िर था हंसी जो हिजाब में चेहरा इस तरह देखा उस हंसी ने कल वो दिखे हर गुलाब में चेहरा और वो हसने में लगा मुझपर था यहाँ भीगा आब में चेहरा …
प्यार की अब होती फुवार कहाँ | Ghazal pyar ki phuvar
प्यार की अब होती फुवार कहाँ ( Pyar ki ab hoti phuvar kahan ) प्यार की अब होती फुवार कहाँ दिल उसी का अब बेक़रार कहाँ शबनमी रूठी प्यार की ऐसी हो रही फूलों की बहार कहाँ भूलने के जतन किये हर इक याद से उसकी ही क़रार कहाँ सूखा…
भूल जाने का उसे ए रब असर दे | Ghazal bhool
भूल जाने का उसे ए रब असर दे ( Bhool jane ka rab use asar de ) भूल जाने का उसे ए रब असर दे सब्र ऐसा जिंदगी भर रब मगर दे बेरुख़ी से देखना वो छोड़ दे वो ए ख़ुदा उसको मुहब्बत की नज़र दे के न जाने हाल क्या…