साये चले | Ghazal Saaye Chale

साये चले

( Saaye Chale )

ऐसे ऐसे अंधेरे कि साये चले
पाँव डर डर के हम भी बढ़ाये चले

जश्न तेरी ख़ुशी का मनाये चले
अश्क पलकों में अपनी छुपाये चले

अपनी हर इक ख़ुशी का गला घोंटा कर
तेरी महफ़िल को रंगीं बनाये चले

रात चमकी थी कुछ देर नन्ही किरण
हम उसी दम पे अरमां जगाये चले

रोयें पढ़ पढ़ के क्यों अपनी रूदादे- ग़म
नक़्श अपने यूँ सब हम मिटाये चले

ग़म गुसारों की क्या हम कहानी कहें
पहले अपने उठे फिर पराये चले

कितनी पुरदर्द है मेरी साग़र ग़ज़ल
अश्क वो भी तो दो इक बहाये चले

Vinay

कवि व शायर: विनय साग़र जायसवाल बरेली
846, शाहबाद, गोंदनी चौक
बरेली 243003

यह भी पढ़ें:-

यह आग अभी | Geet Yah Aag

Similar Posts

  • बोलेंगे | Bolenge

    बोलेंगे ( Bolenge ) रोज़ हम इंकलाब बोलेंगे ? रोज़ ही बेहिसाब बोलेंगे ख़ूबसूरत बड़ी फ़बन इसकी देश अपना गुलाब बोलेंगे रोशनी प्यार की ही देता है देश को आफ़ताब बोलेंगे ये ही मेरी पहचान है जय हिंद जोर से ही ज़नाब बोलेंगे पूछेगा जो गवाह में जय हिंद ये ही अपना ज़वाब बोलेंगे है…

  • हँसकर मिलते हो | Hans Kar Milte ho

    हँसकर मिलते हो ( Hans Kar Milte ho )   जो तुम यूँ हँसकर मिलते हो फूलों के माफ़िक लगते हो ग़म से यूँ घबराना कैसा आख़िर इससे क्यों डरते हो तुम जैसा तो कोई नहीं,जो माँ के चरणों में रहते हो गाँव बुलाता है आ जाओ क्यों तुम शहरों में बसते हो नफ़रत के…

  • अहसान रहेगा | Ahsan Rahega

    अहसान रहेगा ( Ahsan Rahega ) मतला– उस पर भी अभिमान रहेगा याद जिसे अहसान रहेगा हुस्ने-मतला– जिस दिल में भगवान रहेगा उस पर जग क़ुर्बान रहेगा जिस दिल में हो तू ही तू बस उसको क्या कुछ भान रहेगा मेरे आँसू पोंछ भी दे अब मेरा भी कुछ मान रहेगा जिस पर वंशीधर मोहित…

  • बुग्ज़ दिल से निकाल देते हैं | Bugz Dil se Nikal Dete Hain

    बुग्ज़ दिल से निकाल देते हैं ( Bugz dil se nikal dete hain ) बुग्ज़ दिल से निकाल देते हैंबिखरे रिश्ते सॅंभाल देते हैं। किसकी बाज़ी है देखने को येएक सिक्का उछाल देते हैं। बात जब दोस्ती की चलती हैलोग अपनी मिसाल देते हैं। रोज़ कहते की भूल बैठे होदिल तुम्हारा खॅंगाल देते हैं। ये…

  • तमन्न-ए-क़ल्ब | Tamanna-e-Qalb

    तमन्न-ए-क़ल्ब ( Tamanna-e-Qalb ) हर तमन्न-ए-क़ल्ब मर जाए।वो अगर अ़ह्द से मुकर जाए। और भी आब-जू निखर जाए।वो अगर झील में उतर जाए। वो अगर देख ले नज़र भर कर।सूरत-ए-आईना संवर जाए। क्या करें जान ही नहीं जाती।जान जाए तो दर्द-ए-सर जाए। जेब ख़ाली है ह़ाल बोसीदा।ऐसी ह़ालत में कौन घर जाए। हाथ रख दे…

  • ह़ासिल मुक़ाम करना है | Faraz ki Ghazal

    ह़ासिल मुक़ाम करना है ( Hasil muqam karna hai )    करें वो जो भी उन्हें काम धाम करना है। हमें तो सिर्फ़ मुह़ब्बत को आ़म करना है। अभी जो आग लगाकर गए हैं इस दिल में। कहाँ हैं ढूँढिए उन को सलाम करना है। जमाले यार को लफ़्ज़ों में ढाल कर रखना। हमें तो…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *