महाशिवरात्रि:- जागृतिका उत्सव
महाशिवरात्रि का त्यौहार भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह के उपलक्ष्य में मनाया जाता है । यह त्यौहार फागुन महीने के कृष्ण पक्ष के चतुर्दशी को मनाया जाता है, इस दिन भगवान शिव ने तांडव नृत्य किया था।
जो सृजन संरक्षण और विनाश का ब्रह्मांडीय नृत्य है।
शिवरात्रि से जुड़े अनेक मान्यताएं प्रचलित है जो इस प्रकार से हैं-
*मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव के ज्योतिर्लिंग में प्रकट हुए थे।
*इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती का प्रणय- सूत्र बंधा था।
*जो व्यक्ति इस दिन व्रत रखकर भोलेनाथ की आराधना करता है भगवान उसके सभी मनोरथ पूर्ण करते हैं।
*महाशिवरात्रि का महत्व शिवरात्रि से कई गुना ज्यादा होता है।
ऐसा माना जाता है कि इस दिन प्रकृति परमात्मा का मिलन होता है इस दिन जागरण करने का विशेष महत्व है।
रात्रि में जागरण करने से व्यक्तियों के अंदर सकारात्मक ऊर्जा प्रवेश करती है जो जीवन को सार्थक बनाती है।
यदि नियम अनुसार पूजा, अभिषेक करने के साथ एक उपाय भी कर लें तो बड़ी समस्या से निजात पाया जा सकता है।
यह खास उपाय है कि इस दिन रुद्राक्ष धारण करना महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव की षोडशोपचार पूजन की जाती है।
भगवान शिव की पूजन में भस्म के साथ-साथ रुद्राक्ष का विशेष महत्व बताया गया है।
महाशिवरात्रि जैसा के नाम से ही प्रतीत होता है कि इस दिन बाबा भोले का विशाल रूप देखने को मिलता है इसलिए इसे महाशिवरात्रि कहा गया है महाशिवरात्रि के अर्थ का खंडन करें तो हमें यह देखने को मिलेगा की महा मतलब विशाल , बड़ा शिव अर्थात त्रिलोकी, रात्रि मतलब रात तीनों को मिलाकर देखा जाए तो रात भर जागरण भोले बाबा का करना ही महाशिवरात्रि कहा जाता है।
वैज्ञानिक दृष्टि से महाशिवरात्रि का अर्थ बहुत खास है ।
वैज्ञानिकों का कहना है कि इस रात ग्रह और नक्षत्र की स्थिति विशेष होती है इस वजह से इस रात मनुष्य के अंदर की ऊर्जा प्राकृतिक रूप से ऊपर की ओर जाने लगती है यह ऊर्जा प्रवाह भौतिक और मानसिक शक्ति को संतुलित करता है।
महाशिवरात्रि के वैज्ञानिक महत्व:-
*इस रात पृथ्वी का उत्तरी गोलार्ध इस तरह होता है कि मनुष्य के अंदर की ऊर्जा ऊपर की ओर जाने लगती है।
*इस रात चंद्रमा और तारों की स्थिति विशेष होती है चंद्रमा पृथ्वी के सबसे नजदीक होता है जिससे उसकी गुरुत्वाकर्षण शक्ति बढ़ जाती है।
*इस प्रकार की खगोलिक स्थिति न केवल हमारे शरीर की ऊर्जा को प्रभावित करती है बल्कि यह हमारे मन और आत्मा को भी शुद्ध करती है।
*इस रात जागरण करने और रीढ़ की हड्डी सीधी करके ध्यान लगाने के लिए कहा जाता है।
*इस रात शिवलिंग का जल और दूध से अभिषेक करने मात्र से सकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ता है।
*इस रात भजन कीर्तन और ध्यान करने का विशेष महत्व है सकारात्मक ऊर्जा की प्राप्ति होती है।
महाशिवरात्रि त्योहार पर विशेष सामग्रियों से पूजा अर्चना की जाती है जिसका विशेष महत्व भी होता है जैसे-बेलपत्र, धतूरा, भांग,शमी का पत्ता, गंगाजल दूध, दही, शहद ,चावल ,काले तिल, गेहूं, धतूरा सफेद चंदन ,भस्म ,आंक के फूल मदार का फूल भोले बाबा को जरूर अर्पित करनी चाहिए क्योंकि यह वस्तु भगवान शंकर को अत्यधिक प्रिय है।
महाशिवरात्रि के व्रत के दौरान कुछ खास चीजों को खाने की मनाही होती है इस दिन तामसिक भोजन नहीं करना चाहिए लहसुन, प्याज मांस ,मदिरा नहीं खाना चाहिए।
यह मानसिक एकाग्रता को भंग करती है महाशिवरात्रि के व्रत में अन्य और सामान्य नमक का सेवन नहीं करना चाहिए।
महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव की पूजा देश के कई मंदिरों में की जाती है खासतौर पर उज्जैन और देवघर के मंदिरों में इस दिन विशेष तैयारी की जाती है इसके अलावा आंध्र प्रदेश ,कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु और तेलंगाना के मंदिरों में भी महाशिवरात्रि का त्यौहार बड़े धूमधाम से मनाया जाता है।
अगर आसपास मंदिर नहीं है तो घर में मिट्टी बनाकर शिवलिंग की पूजा की जाती है इसमें तुलसी मां की पूजा नहीं की जाती या तुलसी का पत्ता प्रसाद के रूप में नहीं प्रयोग करना चाहिए तुलसी जी को इस पूजा में निषेध बताया गया है।
महाशिवरात्रि पूजा की विधि-
सुबह उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहने।
शिवलिंग पर भांग बेलपत्र धतूरा चढ़ाएं।
शिवलिंग पर फूल- फल चढ़ाएं।
शिवजी को पंचामृत चढ़ाएं।
शिव मंत्र और शिव चालीसा का पाठ करें।
सभी देवी देवताओं की आरती उतारे गणेश जी को प्राथमिकता दें।
शिव परिवार की पूजा अर्चना करें।
महाशिवरात्रि के दिन व्रत रखने से शिव शंकर भगवान प्रसन्न होते हैं किंतु इसका फल हमें प्रदोष काल में पूजन से मिलता है।
ऐसा भी माना जाता है कि भगवान भोले की पूजा करने से हमारे सारे संकट दूर हो जाते हैं, शारीरिक पीड़ा मानसिक पीड़ा अन्य पीड़ाओं से मुक्ति महामृत्युंजय जाप के द्वारा हमें मिल जाता है ।
देवों के देव महादेव बहुत जल्द अपने भक्तों पर प्रसन्न हो जाते हैं इसलिए हमें महाशिवरात्रि का व्रत जरूर रखना चाहिए जब व्रत ना रख सके तो इस दिन पूजन अर्चन ध्यान से करना चाहिए जिससे हम अपने धार्मिक कार्यों से अपने भक्ति से बाबा भोले को प्रसन्न कर सके
साथ ही महाशिवरात्रि के दिन जागरण का विशेष फल सभी भक्तों को प्राप्त होता है।

श्रीमती ज्योति राघव सिंह
भारतीय लेखिका व कवयित्री
वाराणसी (काशी) उत्तर प्रदेश
यह भी पढ़ें:-







