नन्द किशोर बहुखंडी की कविताएं | Nand Kishore Poetry
छलावा उनकी प्रेम की बातें सिर्फ़ छलावा है,गंगा, यमुना तहजीब मात्र एक दिखावा है। भाईचारे की बात करके गर्दन काट देते हैं,सेवँई आपको खिलाएँ, दिवाली की मिठाई न खाते हैं। मेहमान, दोस्त बनकर आते दिल में जहर भरे रहते,कब आपको डस डाले, इसी फिराक में सदा रहते। समझो इस धोखे को अब एकजुट सबको रहना…










