प्रतिबिंब
गाँव के प्राचीन पीपल की घनी छाया तले, जहाँ कभी उनकी वाणी से विद्या के दीप प्रज्वलित होते थे, वहीं आज मास्टर शिवप्रसाद जीवन की संध्या बेला में एक शांत, संतुलित और सजग अस्तित्व के रूप में बैठे दिखाई देते हैं।उनका कुर्ता भले ही समय की मार से पुराना हो गया हो, पर उनके विचार…










